जीवन के 46वें साल में कदम रखने जा रहे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सख्त तेवर और दिलेरी के लिए हमेशा से ही जाने जाते रहे हैं। ऐसा ही एक घटना वर्ष 1998 की है जब गोरखपुर का नखास इलाका तनाव की आग में जल रहा था और योगी के आते ही नजारा बदल गया था। आगे की स्लाइड में जाने पूरी कहानी...
शुरुआती दिनों में योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ के सानिध्य में रहे जिनका उन पर बहुत प्रभाव पड़ा। इसके बाद इन्हें गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी दी गई। शुरु से ही आदित्यनाथ
योगी जनता की पीड़ा को सुनने के लिए प्रतिदिन जनता दरबार लगाते रहे हैं। यहां लोगों की समस्याओं का त्चरित निदान किया जाता है।
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yogi adityanath
- फोटो : अमर उजाला
जनता की समस्याएं और उनकी सहूलियत हमेशा से ही योगी की प्राथमिकता रही है। इसलिए उन्हें जनता में सम्मान की नजर से देखा जाता है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने सीएम योगी से जुड़ा एक वाकया शेयर किया है। उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात के दौरान योगी जी की उम्र बेहद कम थी पर उनमें गंभीरता और दृढ़ता कई गुना ज़्यादा नज़र आई।
शलभ ने बताया कि साल 1998 की बात है। उस समय वे पढ़ाई कर रहे थे। तभी गोरखपुर के नखास इलाक़े में एक घटना के बाद तनाव फैल गया। प्रशासन की चूक के चलते दो लोगों की जान भी चली गई। हालात बेक़ाबू से हो गए और तक़रीबन पूरे शहर की भीड़ इस इलाक़े में जा पहुँची। उन्होंने बताया कि उस समय वह और उनके तमाम साथी भी यहाँ मौजूद थे ।
हर पक्ष के लोगों में प्रशासन के खिलाफ ग़ुस्सा था। इसी दौरान हम सबने एक हैरान करने वाला नज़ारा देखा। अचानक योगी जी भीड़ को चीरते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। हम सब दंग रह गए। ये बेहद संवेदनशील मौका था और उनके साथ कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं था। उन्हें देखते ही पुलिस के भी हाथ पाँव फूल गए । मौक़े पर पहुंचते ही योगी अधिकारियों पर बरस पड़े।