रावण का यज्ञ संपन्न हुआ। ब्रह्मा जी ने उसे अमरत्व का वरदान दे दिया। अब मनुष्य और वानर के सिवा कोई भी उसे मार नहीं सकेगा। वरदान पाकर दंभ से चूर रावण ने देवलोक में खलबली मचा दी।कुबेर पर चढ़ाई कर उनका पुष्पक विमान छीन लिया। घबराए देवराज इंद्र देवताओं को लेकर बैकुंठ पलायन कर गए। संपूर्ण धरती राक्षस राज के अत्याचार से कांप उठी। शुक्रवार की शाम रावण जन्म के प्रसंग के साथ विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण काल के दो सालों के बाद रामनगर का सन्नाटा भी खत्म हो गया।
मानस की चौपाइयों से लीलास्थल गूंज उठा। हर-हर महादेव का गगनभेदी उद्घोष हुआ। यूनेस्को की अमूर्त विश्व सांस्कृतिक विरासत में शामिल यह रामलीला 31 दिन तक चलेगी। पहले दिन रावण के जन्म से लेकर 9 अक्तूबर तक पारंपरिक तौर पर लीला का मंचन किया जाएगा।
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रावण जन्म के प्रसंग के साथ रामलीला का शुभारंभ
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काशीराज के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह के सानिध्य में शुक्रवार को सायं रामबाग के मुख्य द्वार पर लीला का मंचन हुआ। शुरुआत हुई रावण जन्म के साथ। जन्म लेने के बाद रावण यज्ञ करता है और प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उसे इच्छित वर मांगने को कहते हैं। रावण ने कहा हे प्रभु हमें ऐसा वर दें कि मनुष्य और वानर के सिवा कोई और उसे मार ना सके। ब्रह्मा जी ने तथास्तु कहा। वहीं कुंभकरण ने भी छह मास सोने और एक दिन जागने का वर मांगा।
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विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का भव्य आगाज
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ब्रह्मा जी लंका से जाने से पहले लंकिनी से कहते हैं कि जब एक वानर के मुक्के से तुम घायल होकर जमीन पर गिर पड़ोगी तो समझ लेना कि राक्षस राज का अंत नजदीक आ गया है। उधर वरदान मिलने के बाद दंभ से चूर रावण ने अत्याचार शुरू कर दिया। इंद्र भी घबराकर देवताओं के साथ बैकुंठ पलायन कर गए। गाय का रूप धारण कर पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास जाती हैं और रावण के अत्याचार की दुहाई देती हैं। इसके साथ ही श्री रामचरितमानस के बालकांड की चौपाइयों के गायन के बाद लीला को एक घंटे के लिए विराम दे दिया गया। दूसरे प्रसंग में क्षीरसागर की भव्य झांकी सजाई गई।
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रामलीला कि शान समझी जाने वाली शाही सवारी
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विश्व प्रसिद्ध रामलीला कि शान समझी जाने वाली शाही सवारी शुक्रवार को शाम पौने पांच बजे परंपरागत तरीके से धूमधाम के साथ निकली। शाही बग्घी पर काशी राज के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह सवार थे। शाम पौने पांच बजे रामनगर दुर्ग के मुख्य द्वार से निकली। शाही सवारी को देखने के लिए किला रोड पर हुजूम उमड़ पड़ा।
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शाही सवारी
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शाही सवारी जिधर से होकर निकली उधर का इलाका हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। अनंत नारायण सिंह हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। लीला स्थल के पास 36 वीं वाहिनी पीएसी रामनगर की टुकड़ी ने अनंत नारायण सिंह को सलामी दी। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।