उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) शासन के दौरान वाराणसी में 2015 में संतों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगी। अखिलेश यादव रविवार को हरिद्वार पहुंचे और उनका आशीर्वाद भी लिया। देखें अगली स्लाइ्डस...।
अखिलेश यादव ने क्यों मांगी अविमुक्तेश्वरानंद से माफी, जानें सपा शासनकाल का मामला
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दरअसल, 2015 में 22 सिंतबर को दिन में गणेश प्रतिमा विसर्जन रोके जाने के विरोध में वाराणसी के गोदौलिया चौराहे पर धरना दे रहे मराठा गणेशोत्सव सेवा समिति के कार्यकर्ताओं के समर्थन में दूसरे दिन जनता सड़क पर उतर आई थी। इस दौरान साधु-संतों के धरने पर बैठने से माहौल गरम हो गया था।
गंगा में प्रतिमा विसर्जन की अनुमति के लिए दो संतों ने अन्न-जल का त्याग कर दिया। लेकिन देर रात पुलिस ने लाठीचार्ज कर लोगों को बुरी तरह पिटाई कर दी थी। लाठीचार्ज से वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने लोगों और साधु-संतो पर लाठियां भांजीं। इसमें स्वमी अविमुक्तेश्वरानंद, बालक दास समेत 40 से अधिक संत-बटुक घायल हुए थे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमने देखा कि उनके मन में उस घटना के लिए पछतावा था। गलती किसी से भी हो सकती है। अपनी गलती को मानकर सुधार के लिए तत्पर होना महत्वपूर्ण है। अखिलेश यादव ने यह जज्बा दिखाया है, इसलिए हम उन्हें अब पुरानी बातें भूलकर नई ऊर्जा के साथ देश समाज की सेवा में लगने को कहा। आशा है कि अब कभी उनके सत्ता में रहते हमारे देवविग्रहों और उनके प्रति आस्था रखने वालों की श्रद्धा का अवमान (अपमान) नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि जब अखिलेश यादव आए तो उनका स्वागत किया गया। जब वे हमारे पास आए तो हम कुछ बोलते, उसके पहले ही उन्होंने कहा शरणागत हूं...। शरणागत के त्याग का शास्त्रों में विधान नहीं है। शरणागत की रक्षा ही धर्म है। यह सोचकर फिर हमने उनसे पुराने संदर्भ में कुछ न कहा और कुशल क्षेम पूछकर उन्हें शंकराचार्य के पास ले गए। उन्होंने शंकराचार्य से निर्देश, आदेश और आशीर्वाद मांगा।
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