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अटल जी को पिता मानने वाले काशी के इस युवक ने मुंडवाया सिर, मणिकर्णिका घाट पर किया पिंडदान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 18 Aug 2018 02:15 PM IST
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मोक्ष नगरी काशी में पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मशांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध किया गया। दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि के बाद मणिकर्णिका घाट पर उनके नाम से श्राद्ध किया गया। मणिकर्णिका घाट पर मनीष उपाध्याय ने विधिविधान से कर्मकांडी ब्राह्मणों द्वारा श्राद्ध व तर्पण किया गया। ब्राह्मणों ने पूर्व प्रधानमंत्री की फोटो के सामने मंत्रोचारण से श्राद्ध पूजन कराया और पिंडदान कर उसे गंगा में प्रवाहित किया।
Atal Bihari Vajpayee
मनीष ने बताया कि मैं बचपन से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपने पिता तुल्य मानता था। गुरुवार को मुझे उनकी मौत की जानकारी हुई। मैं दिल्ली उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए जाना चाहता था पर नहीं जा पाया। आज मैं सुबह से ही टीवी देख रहा था, जैसे ही पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई उसके बाद मैंने उनकी आत्मा की शांति के लिए मणिकर्णिका घाट पर पिंडदान व श्राद्ध-पूजन किया।
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वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर शुक्रवार को गंगा आरती के पूर्व गंगा मंदिर में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गंगा तट अटल बिहारी अमर रहे के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही हो सकती है कि वह जिन राजनैतिक और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति समर्पित रहे उन्हें आगे बढ़ाया जाए।
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को किन्नर समाज ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा विश्वनाथ के द्वार पर किन्नर समाज ने इस युग पुरुष के जाने पर शोक संवेदना व्यक्त की। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास बांसफाटक इलाके में किन्नर समाज ने काशी विश्वनाथ मंदिर के ब्राह्मणों के साथ उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की ।