धर्म नगरी काशी का रथयात्रा मेला देश भर में प्रसिद्ध है। इस मेले के साथ प्रसिद्ध है वाराणसी की विशेष मिठाई 'नानखटाई'। रथयात्रा मेले में भगवान जगन्नाथ को इसका भोग लगाया जाता है। नान खटाई बटर कुकीज का भारतीय स्वरूप है। शिव की नगरी काशी जितनी अपनी धार्मिकता के लिए प्रसिद्ध है उतनी ही अपनी मिठाइयों के लिए। और इसी का उदाहरण है नानखटाई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी शहर के रथयात्रा स्थित रथयात्रा मेला क्षेत्र में आपको कुछा मीठा के नाम पर नानखटाई ही दिखाई देगा। वाराणसी के इस तीन दिवसीय मेले में इसका खास महत्व है। इस मेले में काशी ही नहीं बल्कि देश विदेश से आए श्रद्धालुओं का ध्यान यहां मिलने वाले नानखटाई की ओर जाता है। वैसे तो नानखटाई सालों भर मिलती है लेकिन रथयात्रा में इसका महत्व ज्यादा है।
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पुराने समय की एक ऐसी चीज जिसका स्वाद समय के साथ बदल कर और स्वादिष्ट हो गया है तो वह नान खटाई। इसकी खासियत है कि इसे मुंह में रखते ही ये घुल जाती है। इस बार के रथयात्रा मेले में श्रद्धालु व पर्यटकों ने नानखटाई के लगभग 40 से ज्यादा प्लेवर का स्वाद उठाया।
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समय के साथ पारंपरिक नानखटाई भी आधुनिक हो गया है। इस बार के रथयात्रा मेले में चॉकलेट, स्ट्राबेरी सहित कई आकर्षक फ्लेवर के नानखटाई उपलब्ध है। वाराणसी के अलावा आगरा, लखनऊ, कानपुर की ननखटाई भी मेला क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी।
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नानखटाई पर 10 से 20 प्रतिशत तक महंगाई का असर भी है। रथयात्रा का लक्खा मेला और नानखटाई का संबंध बहुत ही पुराना है। न केवल श्रद्धालु बल्कि नानखटाई से जुड़े व्यापारी इस मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दौरान जहां तरह-तरह की नानखटाई ठेलों और दूकानों पर सजी नजर आती है तो लोग ताजी नानखटाई का आनंद भी लेते देखे जाते हैं।