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समलैंगिकता से जुड़े फैसले पर काशी के समाजशास्त्रियों और धर्माचार्यों ने क्या कहा, जानिए

Sun, 09 Sep 2018 10:34 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 09 Sep 2018 10:34 AM IST
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Varanasi people recation on LGBT verdict
एलजीबीटी - फोटो : self
समलैंगिकता के मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय ने इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यौन झुकाव को प्राकृतिक बताया है और कहा कि इसे लेकर किसी तरह का भेदभाव संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले पर जिले के कानूनविदों, समाजशास्त्रियों और धर्माचार्यों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं जाहिर की हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें....
Varanasi people recation on LGBT verdict
arvind joshi - फोटो : amar ujala
बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद जोशी ने कहा कि जीवन व स्वतंत्रता के अधिकारों की दलील एवं आधुनिकता के आधार पर समलैंगिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। दो बालिग सहमति से यौन संबंध स्थापित कर सकते हैं, इसको जब हम भारतीय समाज की स्थापित संस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में देखते हैं तो स्पष्ट होता है कि इससे समाज में अनेक समस्याएं पनपेगी। इसे प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।  
Varanasi people recation on LGBT verdict
Rameshwar pur - फोटो : amar ujala
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने कहा कि समलैंगिकता भारतीय संस्कृत और संस्कारों के खिलाफ है। न्यायपालिका के निर्णय पर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन हमें समाज के उच्च आदर्शों और नैतिक मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए। काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. दीपक मालवीय ने कहा कि समलैंगिकता एक प्रकार की कुप्रवृत्ति है। इस पर हर किसी को नियंत्रण रखना चाहिए। ऐसी चीजें समाज को गर्त की ओर ले जाएंगी।
 
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Varanasi people recation on LGBT verdict
varanasi - फोटो : amar ujala
बीएचयू के विधि संकाय के पूर्व डीन प्रो. एमपी सिंह ने कहा कि भारत ही नहीं पूरी दुनिया में समलैंगिकता आदिकाल से चली आ रही है। इस फैसले से समाज में कोई उथलपुथल या अराजकता नहीं होने जा रही है। अब फर्क यह होगा कि समलैंगिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई का पुलिस को जो अधिकार मिला था और जिससे ये लोग डरे-सहमे रहते थे, अब यह सब खत्म हो जाएगा। हम इसे ऐतिहासिक फैसला मानते हैं।    
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Varanasi people recation on LGBT verdict
varanasi - फोटो : amar ujala
सेंट्रल बार के महामंत्री संजय सिंह दाढ़ी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश समाज के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है और इसका बुरा असर पड़ेगा। अधिवक्ता अनुज यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय सोच-समझ कर दिया है। हम सभी कानून के दायरे में रहते हैं इस वजह से इस निर्णय का सम्मान करते हुए हमें इसे मानना चाहिए।
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