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बीएचयू से बाहर एम्स की मांग ने पकड़ा जोर, पीएम संसदीय कार्यालय तक पैदल मार्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 09 Aug 2018 09:49 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू से बाहर 2000 बेड का एम्स बनाए जाने का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। पहले जगह-जगह बैठक कर समर्थन के बाद गुरुवार को बीएचयू सिंह द्वार से पीएम संसदीय कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान पुलिस ने मार्च को पद्मश्री चौराहे पर ही रोक लिया और यहीं से ज्ञापन लेकर लोगों को वापस भेज दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर के नेतृत्व में निकले मार्च के माध्यम से लोगों ने प्रधानमंत्री को मांग पत्र भेजकर अदलपुरा और शहंशाहपुर में एम्स बनवाने की मांग की। इस दौरान पुलिस ने मार्च को पद्मश्री चौराहे पर ही रोक लिया और यहीं से ज्ञापन लेकर लोगों को वापस भेज दिया। प्रधानमंत्री को भेजे गए मांग पत्र में डॉ. ओमशंकर ने कहा है कि काशी चिकित्सा जगत की जननी है और भारतीय संस्कृति की धरोहर भी।
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भगवान धनवंतरि से लेकर देवदास,चरक और सुश्रुत जैसे वैद्य इसी धरती से जुड़े रहे। कभी पूरी दुनिया को स्वस्थ रखने का माद्दा रखनेवाली काशी तथा आसपास की जनता प्रधानमंत्री के सांसद रहने के बावजूद अपने विशिष्ट इलाज के लिए पूरे भारतवर्ष में भटकने को मजबूर हैं। लंबे समय से एम्स के लिए चल रहे आंदोलन के बाद गोरखपुर में एम्स बनवाने की घोषणा से बड़ी आहत हुए। सर सुंदर लाल अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी क्या कई विभागों में इलाज भी संभव नही है।
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अस्पताल कर्मचारियों को ही बेड नहीं मिल पा रहा है और इलाज के अभाव में उनकी मौत हो जा रही है। कहा कि मानक की अनदेखी कर 927 बेड वाले अस्पताल में इधर-उधर बेड लगवाकर कुछ कोशिश की गई लेकिन मानक के अनुरूप न होने, अनुपात में डॉक्टर, कर्मचारियों की संख्या न बढ़ने से मरीजों की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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एम्स
पीएम को भेजे पत्र की कुछ खास बिंदू
- 300 बेड की आईसीयू की जरूरत लेकिन किसी तरह 30 ही है मौजूद।
- चिकित्सकों की कमी की वजह से जूझते हैं मरीज
- 2000 बेड का एम्स बनने से बेहतर इलाज मिलेगा
- चिकित्सकों की तैनाती में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया जा रहा है
- 300 बेड की आईसीयू की जरूरत लेकिन किसी तरह 30 ही है मौजूद।
- चिकित्सकों की कमी की वजह से जूझते हैं मरीज
- 2000 बेड का एम्स बनने से बेहतर इलाज मिलेगा
- चिकित्सकों की तैनाती में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया जा रहा है