कथक नृत्य साम्राज्ञी सितारा देवी को अब भारत रत्न मिलना चाहिए। उन्होंने कथक को काशी की गलियों से निकालकर विश्व के फलक पर पहुंचाया लेकिन उनकी प्रतिभा के अनुसार सम्मान नहीं मिल सका है। पद्मश्री सितारा देवी के जन्मशताब्दी वर्ष में देश के साथ ही विदेश में भी सांस्कृतिक आयोजन कराने की योजना है।
कथक नृत्य साम्राज्ञी सितारा देवी को भारत रत्न देने की उठी मांग, बेटी ने शुरू की काशी से पहल
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समाज की पाबंदियों से लड़कर कथक को दुनिया भर में मशहूर किया
12 साल की अवस्था में जब बॉलीवुड वाले उन्हें लेने आए तो उसके बाद मां ने 96 साल की अवस्था तक कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धन्नो से सितारा देवी बनने की कहानी के पीछे मां की तपस्या, त्याग, समर्पण और गुस्सा भी था। गुस्सा उन पर जिन्होंने उनके नृत्य पर उनके पिता के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने उस गुस्से को अपनी ताकत बनाया। देश ही नहीं विदेश में सितारा देवी के नृत्य की चमक बिखरी।
चीन और रूस जैसे देशों से उन्हें नागरिकता का आमंत्रण भी मिला, लेकिन मां को भारत और अपनी काशी से जो लगाव था, उसने उन्हें कहीं नहीं जाने दिया। समाज की पाबंदियों से लड़ते हुए उन्होंने कथक को पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया। जयंती माला ने सरकार से मांग की है कि उनकी मां की उपलब्धियों को देखते हुए भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। हम लोग इसकी पहल काशी से करने जा रहे हैं।
गंगा घाट पर होगा तीन दिवसीय महोत्सव
सितारा देवी की पुत्री जयंती माला ने बताया कि मां के शताब्दी जन्म महोत्सव के अवसर पर काशी में तीन दिवसीय महोत्सव से सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत होगी। गंगा घाट पर होने वाले इस आयोजन में अनूप जलोटा, अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन समेत कई नामीगिरामी कलाकार हिस्सा लेंगे।
सितारा देवी की कथक नृत्य की संपूर्ण यात्रा पर फिल्म बनाने की तैयारी की जा रही है। इसमें सितारा देवी की भूमिका उनकी नतिनी ऋषिका निभाएगी। फिल्म की पटकथा तैयार है। जल्द ही इस पर काम भी शुरू होगा। फिल्म की अधिकांश शूटिंग बनारस में ही होगी।