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इस कुंड में स्नान से पूरी होती है संतान की कामना, देशभर से आएंगे हजारों दंपती

Fri, 25 Aug 2017 05:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 25 Aug 2017 05:06 PM IST
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Varanasi lolark kund bath is complete with the desire of children
lolark kund - फोटो : अमर उजाला
संतान की कामना के लिए देश-विदेश के हजारों दंपती लोलार्क षष्ठी स्नान के लिए काशी आएंगे। अस्सी के भदैनी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर 26 अगस्त को आस्था का यह मेला गुलजार होगा। काशी के लक्खा मेलों में शुमार लोलार्क षष्ठी स्नान की तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही है। आगे की स्लाइड में जानें इस कुंड का महत्व...
Varanasi lolark kund bath is complete with the desire of children
lolark kund - फोटो : अमर उजाला
लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित कूच विहार स्टेट के एक राजा चर्मरोग से पीड़ित और नि:संतान थे। यहां स्नान करने से न केवल उनका चर्मरोग ठीक हुआ बल्कि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने इस कुंड का निर्माण सोने की ईंट से कराया था।
Varanasi lolark kund bath is complete with the desire of children
lolark kund - फोटो : अमर उजाला
आदर्श सेवा संस्कृत विद्यालय ईश्वरगंगी के प्रधानाचार्य पंडित उमाशंकर चतुर्वेदी कंचन बताते हैं कि लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी वाले दिन कुंड से लगे कूप से पानी आता है। सूर्य की रश्मियों के पानी में पड़ने से संतान उत्पत्ति का योग बनता है।
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Varanasi lolark kund bath is complete with the desire of children
lolark kund - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान महिलाओं के स्नान करने से वे संतान प्राप्त करती हैं। इसके अलावा संतान की रक्षा के लिए भी महिलाएं स्नान करती हैं। वहीं, संन्यासी मोक्ष के लिए स्नान करते हैं। दंपती स्नान के बाद कुंड पर ही कपड़े छोड़ देते हैं। छाया, टोना, टोटका आदि का निवारण भी होता है। एक फल त्यागने का भी विधान है।
 
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Varanasi lolark kund bath is complete with the desire of children
lolark kund - फोटो : अमर उजाला
26 अगस्त को लोलार्क कुंड पर स्नान की शुरुआत सूर्योदय के दो घंटे पहले हो जाएगी, जो सूर्यास्त तक चलेगी। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि सूर्योदय के दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक स्नान का विधान है। 25 अगस्त की रात 12:30 बजे कुंड पर पूजन होगा। इसके बाद भोर से स्नान पर्व शुरू हो जाएगा जो सूर्यास्त तक चलेगा।
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