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बनारस आईईडी ब्लास्ट: पांचवीं कक्षा के छात्र ने बयां किया खौफनाक मंजर, कांप उठी रूह
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 31 Aug 2018 10:25 AM IST
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- फोटो : amar ujala
वाराणसी के मिल्कोपुर गांव में आईईडी से दो धमाके कर सोये हुए व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई। खली-चूनी व्यापारी लालजी यादव और उनके पुत्र की हत्या जमीन के विवाद में की गई थी। लालजी यादव के पास की चारपाई पर उनका भतीजा 10 वर्षीय मंजीत यादव भी सोया था। धमाके के कारण मंगलवार की रात उसे काफी देर तक कुछ सुनाई ही नहीं दिया। बुधवार सुबह उसने घटना का खौफनाक मंजर लोगों को बताया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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फूफा और खून से लथपथ उनके बेटे को देख कर मंजीत की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। वह भाग कर सड़क के उस पार स्थित अस्पताल में चला गया। मुनारी गांव निवासी मंजीत पांचवीं कक्षा का छात्र है। वह हाल में ही अपने फूफा के घर आया था। मंगलवार की रात वह भी बरामदे में फूफा के पास की चारपाई पर सोया था। मंजीत ने बताया कि बरामदे से उस पर करकट गिरा तो उसकी नींद खुली। वह जागा तो उसे बगल में लेटे फूफा नहीं दिखे और कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।
घटनास्थल का पुलिस के उच्चाधिकारियों ने लिया जायजा
- फोटो : amar ujala
बाहर आया तो बड़े भाई अजय खून से लथपथ थे। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करे। सुबह पांच बजे के लगभग गौराकलां निवासी नाना राधेश्याम आए तो उसकी जान में जान आई। इसी दौरान मौके से गुजरे राहगीर सतीश ने लालजी के रिश्तेदारों के साथ ही पुलिस को सूचना दी। तब जाकर लगभग सवा छह बजे पुलिस गांव पहुंची और तफ्तीश शुरू हुई।
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सोये हुए पिता पुत्र के तख्त और चारपाई के नीचे डेटोनेटर फ्यूज और वायर लगा किए धमाके
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लालजी यादव की बेटी मुंबई में रहती है और हाल ही में उसने बच्चे को जन्म दिया है। लालजी के परिजनों ने बताया कि उनकी पत्नी प्रभावती देवी अपने छोटे बेटे सत्यप्रकाश के साथ बेटी और नाती की देखभाल करने के लिए मुंबई गई हुई है। अजय ही अपनी मां को मुंबई छोड़कर आया था। ग्रामीणों का कहना था कि अजय की मौत उसेे यहां बुला लाई। बुधवार को परिजनों ने राम सिंह और प्रभावती को हादसे में गंभीर रूप से घायल होने की बात कह कर दोनों को गांव लौटने के लिए कहा।
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परिजनों ने बताया कि पत्नी और छोटे बेटे के गांव वापस आने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि लालजी बेहद मिलनसार प्रवृत्ति के थे। अपने काम से काम रखते थे। किसी को खली-चूनी उधार देने से भी वो परहेज नहीं करतेे थे। रोजाना सुबह चार बजे से जाग कर पूजापाठ करने के बाद वो अपने दुकान पर रहते थे।