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हौसले को सलाम, ट्राई साइकिल को बना ली दुकान, बनाया भरण-पोषण का जरिया
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 12 Sep 2018 10:26 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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राजनाथ अपने हौसले से शारीरिक अक्षमता को मात देकर समाज में मिसाल कायम कर रहे हैं। परिवार के जीविकोपार्जन के लिए ट्राईसाइकिल को दुकान बनाकर खाने-पीने के सामान और खिलौने रखकर पांच से सात किलोमीटर तक घूमकर बेचने का काम करने लगे। इसी से वह दो बेटियों सोनी, मोनी और एक बेटा राजा की पढ़ाई लिखाई समेत परिवार का खर्चा चलाता है।
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बताया कि जलनिगम की तरफ से उनके जमीन पर सरकारी ट्यूबवेल लगाया गया था। इसके एवज में चार हजार प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उनके विकलांग होने के बाद वह भी मिलना बंद हो गया। सरकारी सहायता के बारे में पूछे जाने पर कहते हैं कि उन्हें सरकारी सहायता मिलने या न मिलने की किसी से कोई शिकायत नहीं है। वह अपने बच्चे की पढ़ाई लिखाई अपनी मेनहत की कमाई से कराना चाहते हैं।
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हालांकि शासन प्रशासन से उनकी एक ही मांग है कि उन्हें रहने के लिए सरकारी आवास मिल जाए। जिस घर में वह रहते हैं, वह जर्जर हो चुका है। वहीं लाख प्रयास बाद भी विकलांगों के हित में चलाई जा रहीं सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर वह सरकारी योजना के पीछे हर रोज चक्कर लगाएं तो उनके परिवार को रात में भूखे सोना पड़ेगा। क्योंकि इतनी कमाई नहीं कि एक दिन की कमाई से दो दिन खर्चा निकल सके।