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क्रिसमस पर विशेष: धर्मनगरी काशी में हैं 44 चर्च, लेकिन उनमें से ऐतिहासिक है ये गिरजाघर 

Wed, 25 Dec 2019 12:50 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 25 Dec 2019 12:50 PM IST
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St. Marys Church Historical christmas in varanasi
सेंट मेरी चर्च वाराणसी। - फोटो : अमर उजाला।

धर्मनगरी काशी में क्रिसमस का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंगलवार की मध्यरात्रि में प्रभु यीशु के जन्म के साथ ही फिजा में मैरी क्रिसमस, हैप्पी क्रिसमस गूंज उठा। शहर भर के चर्चों में प्रभु यीशु के जन्म के प्रतीक के रूप में चरनी सजाई गई है। घरों और कालोनियों में कैरोल गीत गूंज रहे हैं। मसीही गीतों के बीच सेंटा ने लोगों में गिफ्ट एवं टाफियों का वितरण किया। शहर में कई जगहों पर डोर-टू-डोर कैरोल सिंगिंग का दौर देर रात तक चलता रहा।

St. Marys Church Historical christmas in varanasi

बनारस में आपको बता दें, कि कुल 44 चर्च हैं। शहर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सेंट थॉमस चर्च (गोदौलिया), लाल गिरजाघर (नदेसर), तेलियाबाग चर्च, सेंट पॉल्स चर्च (सिगरा), रामकटोरा चर्च,  बेथेलफुल गॉस्पल चर्च(महमूरगंज) और सेंट मेरीज महागिरजा (छावनी) जैसे कई चर्च हैं। लेकिन छावनी क्षेत्र स्थित सेंट मेरीज महागिरजा मसीही आस्था का प्रमुख केंद्र है। साथ ही यह युवाओं में काफी मशहूर है।

St. Marys Church Historical christmas in varanasi

बनारस के छावनी इलाके में स्थित सेंट मेरीज महागिरजाघर करीब दो सौ साल पुराना है। पूरे पूर्वांचल का यह पहला ऐसा चर्च है जिसकी दीवारों पर गीता के श्लोक लिखे हैं। इस चर्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी बाहरी दीवारों पर ईसा मसीह के संदेश लिखे हैं तो भीतरी दीवार पर गीता के श्लोक सर्वधर्म समभाव को दर्शाते हैं। क्रिसमस पर यहां तीन दिनों तक मेले का आयोजन होता है। भव्य मेले के बहाने सभी धर्म के लोगों की जुटान होती है, जो काशी की गंगा- जमुनी तहजीब को प्रदर्शित करता है।

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St. Marys Church Historical christmas in varanasi

कैंटोनमेंट क्षेत्र में बने काशी के पहले गिरजाघर का वह घंटा तो एक दशक पहले चोरी ही हो गया, जिसकी आवाज सात किलोमीटर दूर भेलूपुर तक सुनाई देती थी। कैंटोनमेंट स्थित सेंट मेरीज चर्च आम जनता में इंग्लिशिया गिरजाघर के नाम से भी मशहूर है। इसमें ब्रिटिश आर्मी के जवान प्रार्थना करते थे। इसके चलते इसे गैरिसन चर्च (सैनिक गिरजा) भी कहा जाता था। इसके भीतर संगमरमर की बेहतरीन कारीगरी की गई है और स्टेन ग्लास (रंगीन शीशे के टुकड़ों) से पेंटिंग बनाई गई है। इसके परिसर में बंगाल रेजीमेंट के एक ब्रिगेडियर सहित कई सैनिकों के स्मृति स्तंभ भी हैं।

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क्रिसमस पर ना करें पटाखे और डीजे का इस्तेमाल
सेंट मैरीज कैथेड्रल चर्च के प्रमुख फादर विजय शांतिराज ने जनता को क्रिसमस और नववर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि वह पटाखों और डीजे का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा है कि धर्म के भीतरी अर्थ को समझें और उसी के अनुसार पर्व को मनाएं ताकि किसी को पीड़ा न हो।

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