कैंटोनमेंट स्थित सूर्या केसर पैलेस में मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने कल्पवट ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की प्रबंध निदेशक और कैटजी की निदेशक राधा अग्रवाल, जरी एंड जरदोजी की प्रबंध निदेशक सोनिया डिडवानिया, उदय ऑटो सेल्स की डायरेक्टर वंदना सिंह, श्रीसाईं बाबा इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लि. की मैनेजिंग डायरेक्टर राम गोपाल सिंह की पत्नी ज्योति सिंह और प्रकाश पैथोलॉजी एंड रेडियोलॉजी प्रा.लि. की सलाहकार डॉ. शार्वनी सिंह को मंच पर मोमेंटो देकर पुरस्कृत किया।
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वीमेन एक्सीलेंस अवाॅर्ड में मानव एकेडमी ऑफ मार्शल आर्ट्स की छात्राओं को सम्मानित करते हुए।
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इस दौरान सभी सम्मानित महिलाओं के साथ स्मृति ईरानी ने सामूहिक फोटो भी खिंचवाई। अपराजिता कार्यक्रम की शुरुआत नमो-नमो नम: नमस्ते और महाभारत गाने पर कराटे गर्ल के नृत्य से हुई। मानव एकेडमी की 30 छात्राओं ने 20 मिनट तक जूडो-कराटे के हैरतअंगेज कतरब को नृत्य करके प्रस्तुत किया।
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अतिथियों ने दीप जलाकर की कार्यक्रम की शुरुआत।
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इस दौरान द्रौपदी का चीर हरण भी दिखाया गया तो भगवान कृष्ण बनकर आए और कहा- सुनो द्रौपदी तुम्हें आज बचाने आया हूं और कल कोई नहीं आएगा। शस्त्र उठा लो, अब गोविंद न आएंगे...इसके बाद कराटे गर्ल्स ने अपने किक और ब्लॉक से कई प्लाई के टूकड़े कर दिए। हरे राम हरे राम गाने पर जोश और स्टंड से लबरेज डांस देख दर्शक झूम उठे और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। स्मृति ईरानी भी छात्राओं की मुरीद हो गईं और मानव एकेडमी की छात्राओं को भी मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
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एसएसबी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर राम गोपाल की पत्नी ज्योति सिंह।
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रिजेक्शन को नहीं पता कौन महिला है और काैन पुरुष
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि किस्मत हमेशा जीत नहीं लिखती हार भी होती है। जब रिजेक्शन आता है तो उसका ये नहीं पता होता है कि ये महिला है या पुरुष। हम भावनाओं को लिंग से जोड़ देते हैं। वे शुक्रवार को अमर उजाला द्वारा आयोजित वीमेन एक्सीलेंस अवाॅर्ड को संबोधित कर रही थीं।
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कल्पवट आर्गेनिक फाॅर्मिंग और कैटजी की निदेशक राधा अग्रवाल।
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उन्होंने कहा, असफलता को ये नहीं पता कि जो फेल हो रहा वो महिला है या पुरुष। आज अगर मैं पलटकर देखती हूं तो लगता है कि मेरी किस्मत जीत में भी थी और हार में भी। 27 साल की उम्र में 2004 का चुनाव लड़ी। अटल जी जब पीएम थे तब लड़ने का मौका मिला। वो चुनाव जीत जाती तो क्या होता। 2019 चुनाव में अमेठी में हो रही काउंटिंग किसी क्रिकेट मैच के रोमांच से कम नहीं था। हम जीत को इतना मोल देते हैं और भूल जाते हैं कि जो हार कर भी जीत जाए असली सिकंदर तो वही है।