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शिव की नगरी हुई कान्हामय, मंगल ध्वनि के बीच जन्मे भगवान श्रीकृष्ण
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 04 Sep 2018 10:25 AM IST
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- फोटो : amar ujala
काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी कान्हामय रही। ब्रह्मांड के महानायक भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव वैष्णव मतानुयायियों ने धूमधाम से मनाया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर चहुंओर श्रद्धा, उल्लास का माहौल रहा। सोमवार को शहर के वैष्णव मंदिरों में कहीं श्याम प्रभु को पालने में झूलाया, कहीं माखन मिश्री का भोग लगाया तो कहीं बच्चों ने प्रभु स्वरूप में अठखेलियां की। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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रात में 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में शंख, घंटे-घडि़याल और घंटियों की मंगल ध्वनि के बीच कान्हा के प्रतीक रूप खीरे से भगवान के बाल विग्रह को बाहर निकालकर जन्म का विधान पूर्ण कराया गया। वैष्णव जन की ओर से आयोजित जन्मोत्सव के दौरान मधुराष्टकमं की पंक्तियां अधरम मधुरं, बदनं मधुरं, नयनं मधुरं, हसितं मधुरं/ ह्रदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधि पते रखिलं मधुरं... मुखर हो उठीं।
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चौखम्भा स्थित गोपाल मंदिर में ठाकुरजी का दर्शन व छठी पूजन हुआ। मंदिर में सुबह पंचामृत दर्शन, मध्याह्न में तिलक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। रात्रि में जन्म के दर्शन के लिए कतार लगी रही। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में कलश महाभिषेक किया गया। भोगार्पण व महाआरती के बीच जय-जय कृष्णा की गूंज होती रही।
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शंकुलधारा पोखरा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में भोर में भगवान के श्रीविग्रह का शहद से स्नान कराया गया। दूध व घृत स्नान के बाद बालभोग लगाया गया। इसी तरह स्वामी नारायण मंदिर, राधागोविंद मंदिर में राधारमण भगवान का शहद से स्नान के बाद जन्माष्टमी मनायी गयी।
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श्री सत्यनारायण मंदिर ठाकुरजी का जन्मोत्सव मनाया गया। श्री सनातन गौड़ीय मठ में कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। प्रभु को पंचामृत स्नान कराया गया। नूतन वस्त्र और आभूषण धारण कर उनका शृंगार किया गया। इसके उपरांत माखन-मिश्री का भोग लगाकर उनकी आरती-उतारी गई। इस दौरान नंद को आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गूंज होती रही।