काशी एक अद्भुत और अलग नगरी है। जहां पर महादेव के रंग में हर कोई रंग जाता है और जब बात हो उनका बराती बनने की तो क्या बात है...। कुछ ऐसा ही उत्साह दिखा काशीवासियों में महाशिवरात्रि पर। जहां कोई भूत, तो कोई देवता के रुप में नजर आया। शिव बरात में पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक भी हुई और अभिनंदन का अभिवादन भी हुआ। देखे तस्वीरें आगे की स्लाइड्स में...
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mahashivaratri varanasi
- फोटो : amar ujala
लगातार 37 साल से निकल रहे शिव बरात को सोमवार शाम दारानगर स्थित महा मृत्युंजय मंदिर से निकाली गई। देश के ज्वलंत मुद्दों पर आधारित शिव बरात में साड़ बनारसी ने दूल्हा (भोले) और बदरुद्दीन अहमद ने दुल्हन (पार्वती) का रोल निभाया।
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शिव बरात सोमवार को शाम सात बजे दारानगर स्थित महामृत्युंजय मंदिर और तिलभांडेश्वर मंदिर से निकली, जिसमे हाथी, घोड़ा, ऊंट, रथों पर सवार बाबा भोले नाथ और विदेशी अतिथि शामिल रहे। इसमें डमरू दल से लेकर करीब एक दर्जन बैंड पार्टियां शामिल रही। बैलगाड़ी पर किन्नर नृत्य करते हुए चल रहे थे । बाबा की बारात में बज रहे डीजे पर श्रद्धालु बाबा का भक्ति की मस्ती में झूमते हुए चल रहे थे।
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बरात दारानगर स्थित महामृत्युंजय, मैदागिन, बुलानाला, नीची बाग, चौक होते हुए डेढ़सी के पुल पर जाकर समाप्त हुई। बरात में मदारी और सपेरे थे जो गले मे सर्प लटकाकर बाबा के बाराती बने हुए थे। इस बरात में देवस्वरूप की झांकिया थीं जिसमें सभी देवस्वरूप शामिल रहे। बरातियों का स्वागत बनारसी ठंडई से किया गया। बरात को देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे खड़े रहे और बाबा के बारात का आनंद लिया।
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शिव बरात में हाथी, आतिशबाजी, छह तरह के बैंड, जादूगर, किन्नरों की टोली, सपेरा, मदारी, लाग-विमान, नुक्कड़ नाटक, झांकियां, राम-लक्ष्मण, भरत, शतुघभन, ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित कई देवी देवताओं के स्वरूप देखने को मिलें। वहीं, भूत, पिशाच, राक्षस और दिव्यांगों की टोली और लोक नृत्य के साथ ही डांडिया और दिगंबर साधु भी शामिल रहें।