जिस समय लड़कियां क्या लड़कों के भी शिक्षा पर देश में जागरूकता नहीं थी। लोग नौकरी तो दूर पढ़ाई से भी कोसों दूर थे, उस समय एक बेटी ने अपनी पढ़ाई के लिए संघर्ष किया। सर्जरी के क्षेत्र में देश की सर्वोच्च उपाधि ‘एमसीएच’ हासिल करने वाली देश की पहली महिला बाल चिकित्सक सर्जन, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति, आगरा मेडिकल कॉलेज की पहली छात्रा, जिसने जनरल सर्जरी में पढ़ाई की। उनका नाम है पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल, जिन्होंने काशी ही नहीं पूरे देश में शोहरत कमाई है। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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saroj chudamani gopal
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75 साल की उम्र की प्रो. गोपाल आज भी बतौर डिस्टिंग्विस्ड प्रोफेसर बीएचयू के मेडिकल छात्रों को पढ़ाती हैं और जोश-कर्मठता ऐसी कि आधे उम्र के लोग भी मात खा जाएं। प्रो. चूड़ामणि के उपलब्धियों भरे इस सफर के पीछे संघर्षों की लंबी दास्तान है। ये सफर उनके लिए कतई आसान नहीं था।
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प्रो. सरोज चूड़ामणि का मथुरा के एक गांव में जन्म 1944 में हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके पिता प्लाटून कमांडर थें, जन्म के समय प्रो. सरोज के ताऊ जी ने उनके पिता को पत्र लिख कर बताया कि मुझे बताते हुए दुख हो रहा है कि तुम्हारे ऊपर शिला(बोझ रूपी पत्थर) आ गई। इसके बाद प्रो. सरोज के पिता ने भगवान की पूजा की और कहा कि मैं अपनी बेटी का स्वागत करता हूं।
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पहले तो उस दौर में किसी लड़की का मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का निर्णय, वह भी जनरल सर्जरी के क्षेत्र में। दूसरे, लड़कों के बीच अकेली छात्रा। प्रो. गोपाल बताती हैं कि डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर था कि एमबीबीएस में एडमिशन के लिए पांच दिनों तक खाना-पीना छोड़ दिया।
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फिर आगरा के मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जरी में दाखिला तो ले लिया लेकिन लड़कों के बीच अकेली लड़की होने की वजह से परेशानियां कदम-कदम पर थीं। लड़की होकर जनरल सर्जरी लेने पर प्रोफेसरों ने भी असहयोग ही किया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपने अधिकार को पाने के लिए उन्होंने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद जब वे सर्जन बन गई तब उनके पति डा. सिद्ध गोपाल ने भी उनका बहुत साथ निभाया।