{"_id":"5bb724d1867a551d0b12d3a8","slug":"sharda-sinha-performance-in-bhu-music-festival","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"महामना की बगिया में लोककला-संस्कृति की झलक, लोक गायिका शारदा सिन्हा को सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महामना की बगिया में लोककला-संस्कृति की झलक, लोक गायिका शारदा सिन्हा को सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 05 Oct 2018 02:16 PM IST
विज्ञापन
varanasi
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में लोककला और संस्कृति के संवर्द्धन को लेकर तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को शारदा सिन्हा को सुनने श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भोजपुरी की स्वर कोकिला कही जाने वाली लोक गायिका पद्मभूषण शारदा सिन्हा ने बीएचयू के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में अपनी गायकी से सबकाे सराबोर कर दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
varanasi
- फोटो : amar ujala
शुक्रवार सुबह करीब एक घंटे के अपने कार्यक्रम में शारदा सिन्हा ने संस्कार से लेकर छठ गीतों की प्रस्तुति की। इसमे सुप्रसिद्ध गीत 'पटना से वैद्य बुलाई द नजरा गइला गोइया' की प्रस्तुति की तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद 'अमवा महुअवा के झूमे डरिया, तनी ताका न बलमुआ हमार ओरिया', फिर 'कोठवा अटारी चढ़ी चितवे ले धनिया, से नही आइले विदेशिया बलमुआ' के बाद एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति हुई। मणिपुर से आये कलाकारों ने मणिपुरी नृत्य सहित कई प्रस्तुतियां हुई। शनिवार को अंतिम दिन भी कई प्रस्तुतियां होंगी
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मंच कला संकाय में आयोजित वैश्विक लोक संस्कृति: परम्परा एवं प्रतिबिम्ब विषयक त्रिदिवसीय अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ गुरुवार को हुआ। इस दौरान कई राज्यों, विदेश के कलाकारों ने गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से लोक कला, संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर संवर्द्धन का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग के अतिरिक्त सचिव मनोज श्रीवास्तव ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
varanasi
- फोटो : amar ujala
संकाय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में वैश्विक लोक संस्कृति: पंरपरा और उसके प्रभाव विषय पर आयोजित सेमीनार में यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात सहित कई राज्यों के साथ ही थाइलैंड, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस और यूएसए के कलाकार शामिल हुए। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह और नृत्य विभाग की अध्यक्ष डॉ. विधि नागर की देखरेख में आयोजन हो रहा है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शरद कुमार दांडेकर ने भारत की विविध लोक वाद्यों को पंचनाद में प्रस्तुति कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
विज्ञापन
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
श्रीलंका से आई डॉ. एच अंजली मिश्रा की टीम ने श्रीलंकाई नृत्य प्रस्तुत किया। इसके पहले दिन में वक्ताओं में डॉ. अर्चना शर्मा ने सूर्य उपासना की प्राचीनता, डॉ. शांति स्वरुप सिन्हा ने भारतीय लोक संस्कृति में ग्रामीण रामलीला के अवदान की चर्चा की। बड़ोदा विश्वविद्यालय से आए प्रो. गौरांग भावसार ने गुजरात के लोकवाद्यों में आदिवासी नगाड़ा, डकलू, डमरू, घड़ा, नागकड़ी आदि के बारे में बताया। कार्यक्रम में डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के पुस्तक संगीत संवाहिनी की पुस्तक का विमोचन हुआ।