{"_id":"59fefc8a4f1c1b8e698b9658","slug":"see-the-rare-photos-of-varanasi-dev-deepawali","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"काशी की देव दीपावलीः यदि इन तस्वीरों को नहीं देखा तो क्या देखा आपने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी की देव दीपावलीः यदि इन तस्वीरों को नहीं देखा तो क्या देखा आपने
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Sun, 05 Nov 2017 05:32 PM IST
विज्ञापन
dev deepawali
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीनों लोक से न्यारी काशी की धरा पर देवदीपावली की शाम इंद्रधनुषी छटा निखर गई। गंगा का अर्धचंद्राकार किनारा दैवीय आभा से दमक उठा। सुरसरि के घाटों पर ओर से छोर तक दीपों का तारामंडल इठलाने लगा तो पूनम का चांद भी शरमा सा गया। राजघाट से अस्सी घाट तक ऐसे ही अप्रतिम नजारों की झलक पाने के लिए काशी ही नहीं दुनिया के कई देशों के लोग उमड़ पड़े थे। आगे की स्लाइड्स में देखें वो तस्वीरें जो बड़ी खास है।
dev deepawali
- फोटो : अमर उजाला
गंगा तटों पर कहीं फूलों की लड़ियां सजीं तो कहीं रंगोलियां। कहीं हल्दी-चंदन से अल्पनाएं उकेरी गईं तो कहीं फुलझड़ियों की सतरंगी बौछारें उत्सव में आनंद का संचार करती रहीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने कभी काशी में ऐसी ही दिवाली मनाई थी। अब घाट-घाट पर दीपों का ज्योतिर्मय उपहार उसी परंपरा का उत्सव बन गया है।
dev deepawali
- फोटो : अमर उजाला
देव दीपावली की मानो तारे जमीं पर उतर आए हों। उत्तरवाहिनी गंगा का किनारा दीपमालाओं की लड़ियों से तारामंडल सा निखर उठा। कहीं दीपों की अवलियां (पंक्तियां) तो कहीं संदेशपरक अल्पनाएं दीपों की लौ में साकार हुईं। गंगा की मचलती लहरों पर लतरों, ध्वजा-पताकाओं और गेंदा, गुलाब के फूलों से सजे नावों-बजड़ों के झुंड इतराए तो पूर्णिमा का चांद भी हिचकोले खाता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
dev deepawali
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार की शाम काशी में मनाए गए दीपोत्सव का नजारा ऐसा ही रहा। दोपहर बाद ही दीपोत्सव देखने के लिए घर-घर से बच्चों, महिलाओं के साथ लोग गंगा तट की ओर चल पड़े। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट की सीढ़ियां किसी छविगृह की बालकनी की तरह आस्थावानों से खचाखच भर गईं। उसी जन सैलाब के बीच घाट-घाट पर महिलाएं दीप सजाने उतरने लगीं।
विज्ञापन
dev deepawali
- फोटो : अमर उजाला
बच्चे, महिलाएं और युवा दीपों की पंक्तियां सजाने लगे। शाम 5:30 बजे से घाटों पर कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊं नम: शिवाय तो कहीं स्वच्छ भारत अभियान के स्लोगन दीपों की अल्पनाओं में प्रज्ज्वलित होने लगे। दशाश्वमेध घाट पर इंडिया गेट की रिप्लिका के समक्ष अमर जवान ज्योति जलाई गई।