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ऐसे ही नहीं करते हैं पीएम मोदी काशीवासियों के दिलों पर राज, ये है वजह
प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 23 Feb 2019 02:18 PM IST
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17वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनावी शंखनाद से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 18वें दौरे में मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र आए थे। 2014 से 2019 तक मोदी ने बतौर सांसद विकास कार्यों के बूते बनारस को बदलने का संकल्प पूरा किया ही है वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर काशी से उन्होंने कई ऐसे अभियान और योजनाओं को आगे बढ़ाया, जो देश-दुनिया में मिसाल बन गए। आगे की स्लाइड्स देखें...
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काशी की आध्यात्मिकता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत को नजदीक से महसूस कर उसे और समृद्ध करने के लिए प्रधानमंत्री ने वह सब किया, जिसकी काशीवासी कल्पना भी नहीं करते थे। पांच साल में काशी के कायाकल्प का कारण यह है कि प्रधानमंत्री ने 30 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास ही नहीं किया, शुभारंभ कर अपने वादों-इरादों में अंतर न होने को सच साबित कर दिया।
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दरअसल, मोदी ने काशीवासियों से ‘दिल’ लगा लिया और छठ पूजा हो या दीपावली या फिर नया साल, उन्होंने हर अवसर पर वाराणसी को अपने जेहन में रखा। 17 सितंबर को वह अपना 68वां जन्मदिन मनाने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र के बच्चों के बीच आए। शायद इसीलिए वाराणसी के लोग ‘नमो-नमो’ करते हुए शहर में बीते पांच दशक और पांच साल में हुए विकास कार्यों के अंतर की चर्चा करते हैं।
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2019 आते-आते प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा के बारे में दुनिया भर को बताने के लिए नए भारत की संभावनाओं पर समझ बढ़ाने के लिए प्रवासी भारतीय दिवस पर पहली बार नई दिल्ली और राज्यों की राजधानी के बाहर अपनी काशी में आयोजन कराया। तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सौ से अधिक देशों के पांच हजार से अधिक प्रवासी आए और काशी की मेहमाननवाजी के साथ भारत की खुशनुमा यादें लेकर गए।
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इससे पहले प्रधानमंत्री की ही पहल पर शहर और आसपास के जिले के लोगों को बाबतपुर एयरपोर्ट से शहर तक आने के लिए फोरलेन फ्लाईओवर की सुविधा ही नहीं मिली, मौजूदा समय में यहां 80 से अधिक फ्लाइट्स शुरू हो चुकी हैं। देश के सभी बड़े शहरों से यहां के लोग सीधे जा सकते हैं। वाराणसी के क्षेत्रीय कार्यालय से पासपोर्ट का कोटा 800 से बढ़ाकर 1200 कर दिया गया है। बनारस के बदलाव को काशीवासी महसूस करते हैं। काफी काम हुआ है, विपक्षी भी इसे नकारते नहीं हैं।
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