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जानिए उस मंदिर के बारे में जहां राजा भतृहरि आकर करते थे पूजा, आज है उपेक्षा का शिकार

Wed, 10 May 2017 10:29 AM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Wed, 10 May 2017 10:29 AM IST
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people demand to goverment for rebuild and decorate yakshini devi temple varanasi
yakshini temple - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी जिले के दक्षिणी छोर पर मिर्जापुर की सीमा पर स्थित गांव जक्खिनी में अतिप्राचीन यक्षिणी देवी का मंदिर प्रशासनिक उदासीनता का शिकार है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण स्थित इस मंदिर के  बारे में तमाम जनश्रुतियां प्रचलित हैं। आगे की स्लाइड्स में जानिए...
people demand to goverment for rebuild and decorate yakshini devi temple varanasi
yakshini temple - फोटो : अमर उजाला
मंदिर की स्थापना का कोई लिखित इतिहास तो नहीं पर इलाके के बुजुर्गवार बताते हैं कि उनकी पीढ़ियां-दर-पीढ़ियां इस मंदिर और देवी को पूजती रही हैं। यहां राजा भतृहरि द्वारा भी पूजन-अर्चन की कथा प्रचलित है। भतृहरि के कालखंड के अनुसार भी मंदिर कम से कम ढाई हजार साल पुराना ठहरता है। यक्षिणी देवी के नाम पर ही स्थानीय बाजार का नाम जक्खिनी पड़ा।
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yakshini temple - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण स्थित इस मंदिर के  बारे में तमाम जनश्रुतियां प्रचलित हैं। उज्जैन के राजा भतृहरि को जब वैराग्य हुआ तो वे चुनार स्थित एक पहाड़ पर आकर तपस्या में लीन हो गए। इसी स्थान पर उनके अनुज विक्रमादित्य ने किले का निर्माण कराया। यह किला आज भी विद्यमान है। लोक मान्यता है कि भतृहरि नाव से गंगा पार कर यहां यक्षिणी देवी के दर्शन-पूजन के लिए आते थे। 
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yakshini temple - फोटो : अमर उजाला
जक्खिनी के ही निवासी वाराणसी दूरदर्शन के निदेशक रहे डॉ. बीबी शर्मा यक्षिणी देवी और इस क्षेत्र की प्राचीनता के बारे में एक पुस्तक लिख रहे थे लेकिन इसी बीच उनका देहांत हो गया और इस स्थान की ऐतिहासिकता सामने आने से रह गई। जक्खिनी के ही प्रमोद सिंह कहते हैं कि गंगापुर विधानसभा के विधायक रहे उनके बाबा ऋषि नारायण शास्त्री ने उन्हें बचपन में बताया था कि आज जहां मंदिर है पहले वहां बड़ी गुफा और कई प्राचीन भवन थे।
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yakshini temple - फोटो : अमर उजाला
समय के साथ-साथ गुफा नष्ट हो गई और भग्नावशेष खत्म होते चले गए। मंदिर का प्राचीन भवन भी जीर्ण-शीर्ण हो गया तो स्थानीय लोगों ने नया निर्माण कराया। मुंबई में उद्यमी गांव के ही सुरेश शर्मा ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। सुरेश शर्मा ने यक्षिणी से वैष्णवी देवी यात्रा की शुरुआत की और हर साल मां यक्षिणी देवी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से 300 से 500 लोग वैष्णो देवी के दर्शन को जाते हैं। यह परंपरा 21 साल से जारी है। 
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