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तस्वीरें: सीरगोवर्धन में नजर आया सेवा और समर्पण का भाव, रविदास जयंती पर सजा संत का गांव

Sat, 27 Feb 2021 12:56 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Sat, 27 Feb 2021 12:56 AM IST
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On the evening of Saint Ravidas Jayanti conviction of Sir Govardhanpur Varanasi
सीर गोवर्धन में मंदिर में पाठ करते भक्त। - फोटो : अमर उजाला

संत शिरोमणि संत रविदास के सपनों का गांव बेगमपुरा सज धजकर तैयार हो चुका है। संत निरंजन दास जब अपने अनुयायियों का हाल-चाल लेने मेला क्षेत्र में निकले तो पूरा क्षेत्र रविदास शक्ति अमर रहे, जो बोले सो निर्भय और सद्गुरु महाराज की जय के जयकारों से गूंज उठा। शुक्रवार को रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर सीरगोवर्धन में संगत और पंगत की रंगत निखर उठी। जगह-जगह सेवा और समर्पण के नजारे आम थे।


एक तरफ रविदास मंदिर में भक्तों की लंबी कतार लगी थी तो दूसरी ओर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सेवादारों भी मुस्तैद थे। कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर रहे थे। गुरुचरणों की रज पाने के लिए भक्तों की भावनाएं उफान मार रही थीं। श्रद्धालु जगह-जगह खड़े होकर अपने स्थान से ही दंडवत होकर अपने गुरु की अगवानी कर रहे थे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहली बार गुरु और श्रद्धालुओं के बीच यह फासला रखा गया था। मंदिर के ठीक सामने वाली गली में जूता स्टैंड बना है। इस स्टैंड पर लोग धूल में सने जूते रख कर जा रहे हैं और जब लौट रहे हैं तो उनके जूते चमचमाते हुए मिल रहे हैं। जूता स्टैंड पर सेवा देने वाले भक्तों ने बताया कि दूसरों के जूते साफ करना भी धर्म का ही काम है। हम यह सेवा करके खुद को आनंदित महसूस कर रहे हैं। अगली स्लाइड पर क्लिक कर पढ़ें।

On the evening of Saint Ravidas Jayanti conviction of Sir Govardhanpur Varanasi
sant ravidas jayanti

भजन कीर्तन से हुआ गुलजार
भक्तों के निवास कैंप के बाहर भजन कीर्तन का दौर भी चलता रहा। कहीं कीर्तन तो कहीं पंडवानी तो कहीं लोकगीतों के जरिए गुरु के गुणों का बखान करते हुए श्रद्धालु नाच गा रहे थे। हर साल के मुकाबले दुकानों की संख्या कम होने के बाद भी मेले में शायद ही कोई ऐसी दुकान हो जहां रखरीदारों की भीड़ न हो। जूतियों, कपड़ों, साड़ियों, सलवार सूट, शृंगार के साजोसामान से लेकर खिलौनों और चाट पकौड़े की दुकानों पर जमकर खरीदारी हो रही थी।

On the evening of Saint Ravidas Jayanti conviction of Sir Govardhanpur Varanasi
सीरगोवर्धन में लगे मेले में खरीदारी करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

भक्तों के निवास कैंप के बाहर भजन कीर्तन का दौर भी चलता रहा। कहीं कीर्तन तो कहीं पंडवानी तो कहीं लोकगीतों के जरिए गुरु के गुणों का बखान करते हुए श्रद्धालु नाच गा रहे थे। हर साल के मुकाबले दुकानों की संख्या कम होने के बाद भी मेले में शायद ही कोई ऐसी दुकान हो जहां रखरीदारों की भीड़ न हो। जूतियों, कपड़ों, साड़ियों, सलवार सूट, शृंगार के साजोसामान से लेकर खिलौनों और चाट पकौड़े की दुकानों पर जमकर खरीदारी हो रही थी।

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On the evening of Saint Ravidas Jayanti conviction of Sir Govardhanpur Varanasi
सीरगोवर्धन में मोमबत्ती जलाते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

रैदासियों ने जलाएं गुरु की याद में दीप, बिखरी पीली आभा
संत रविदास पार्क में रैदासियों ने गुरु की याद में दीपदान किया। शुक्रवार की शाम को रैदासी भक्तों की टोली नगवां स्थित संत रविदास पार्क पहुंची। संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीपदान के बाद पूरा पार्क दीपों की रौशनी से जगमगा उठा। शुक्रवार को संत रविदास पार्क में रैदासियों का उत्साह देखने लायक था। गुरु की याद में दीपदान करने के बाद भजन कीर्तन करती हुई रैदासियों की टोली ने जमकर नृत्य भी किया। इसके साथ ही सांस्कृतिक आयोजन भी किए गए।

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सीरगोवर्धन पहुंचे श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

तीर्थ मानकर करते हैं सेवा
संत रैदास के भक्त सीर गोवर्धन स्थित जन्म स्थली को तीर्थस्थान मानते हैं। यहा न कोई बड़ा न कोई छोटा है। हर भक्त सेवादार की भूमिका निभाता है। यहां सेवा कर स्वयं को धन्य समझते हैं। एक सप्ताह के अटूट लंगर में सुबह से ही भीड़ शुरू हो जाती है।

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