'मुझे मोदी जी, सुषमा जी से मिलना है। मेरी मदद करो, मैं बहुत गरीब औरत हूं... मेरा सहारा... मेरा इकलौता लड़का महेंद्र वर्मा पिछले 18 महीनें से नेपाल जेल में बंद है। भीख मांग कर पैसे जुटा रही हू्ं... कोई मेरी मदद करो।' एक तख्ती पर लिखी ये बातें न सिर्फ उस बूढ़ी मां का दर्द बयां कर रही है। बल्कि उसकी बेबसी भी दिखा रही है। देखें अगली स्लाइड में...
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- फोटो : amar ujala
पथराई आंखों में उम्मीद की चमक लिए उत्तरप्रदेश के वाराणसी जिले के पांडेयपुर की रहेने वाली 70 वर्षीय अमरावती हस्तकला संकुल के सामने से गुजरने वाले हर शख्स से यही गुहार लगाती रही। हाथों में एक तख्ती लेकर इस उम्मीद से ट्रेड फेसैल्टी सेंटर पहुंची थी कि उन्हें कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला देगा।
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अमरावती बताया कि नेपाल में किसी ने उसके बेटे को पिकप के धक्के से बाइक में टक्कर लगने के बाद जेल में बंद कर रखा है। उसके बेटे को छोड़ने के एवज में अमरावती से डेढ़ लाख रुपये मांगे जा रहे है।
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अमरावती ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वो भीख मांग कर जो भी पैसा मिलता है। उससे वह अपना और अपने परिवार का पेट पालती है। साथ ही अपने बेटे से मिलने जाती हूँ। बस इस उम्मीद में कि मेरा बेटा नेपाल से वापस आएगा।
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साड़ी के पल्लू से आंखों से बह रहे आंसुओं को पोछते हुए वृद्धा ने कहा कि लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बनारस आये हुए हैं। वे आपके बेटे को छुड़ाने में मदद कर सकते है। इन सब बातों के बीच में वह सबसे बस यहू गुहार लगाती रही कि कि उसे कोई मोदी जी से और सुषमा स्वराज से मिला दे।