देश की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी के सौंदर्य में सोमवार को और निखार आया। जब हस्तकला संकुल में 15वें प्रवासी भारतीय दिवस समारोह के पहले दिन आयोजित युवा और उत्तर प्रदेश प्रवासी दिवस में दुनियाभर से आए प्रवासियों ने शिरकत की। विदेशों में बसे प्रवासियों की संस्कृति का बनारस की गंगा जमुनी तहजीब से मिलन भी हुआ। देखें अगली स्लाइड में...
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काशी पहुचे प्रवासी
- फोटो : amar ujala
भारत की सांस्कृतिक सुगंध में प्रवासी सराबोर रहे और वसुधैव कुटुंबकम् की भारतीय संस्कृति को अंगीकार किया। जिससे हस्तकला संकुल मिनी वर्ल्ड के रूप में तब्दील हो गया।
अलग-अलग देशों से आए प्रवासियों ने एक-दूसरे से अपने अनुभव साझा किए और भारतीय संस्कृति व सभ्यता को अपने साथ बनाए रखने पर चर्चा की। सबसे खुशनुमा पहलू यह रहा कि ज्यादातर जगहों पर एक दूसरे से संवाद में हिंदी ही माध्यम रही। हर कोई अपने को भारत से जोड़कर गर्व महसूस कर रहा था।
मलयेशिया, मॉरीशस, फिजी, यूएई और त्रिनिदाद सहित दुनियाभर से आए प्रवासियों के लिए यह दोगुनी खुशी का मौका था क्योंकि उन्हें अपने मूल भारत में पहुंचने के साथ ही काशी के आध्यात्म और संस्कृति से जुड़ने का सौभाग्य जो मिला।
वहीं, प्रवासियों में कई ऐसे भी हैं जिन्हें यह तो मालूम है कि वे भारतवंशी है, मगर उन्हें अपनी जड़े नहीं मालूम हैं। काशी पहुंचने के बाद वे अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए लालायित हैं। हालांकि, मेहमानों की सहूलियत के लिए प्रदेश सरकार ने डाटाबेस तैयार किया है और वह उसी आधार पर अपने पूर्वजों के बारे में पता करने के लिए प्रयासरत हैं।