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मुठभेड़ में दो लाख का इनामी ढेर: वाराणसी समेत तीन मंडलों में डेढ़ दशक से था मनीष का खौफ, लूट और रंगदारी को बना रखा था धंधा

Tue, 22 Mar 2022 12:21 AM IST
उत्पल कांत ललित शंकर पांडेय, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
ललित शंकर पांडेय, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 22 Mar 2022 12:21 AM IST
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Most wanted criminal encounter in varanasi Manish was in fear for one and a half decade
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस। - फोटो : अमर उजाला

पूर्वांचल में हत्या, लूट, रंगदारी सहित अन्य आपराधिक घटनाओं से पुलिस की नाक में दम करने वाले मनीष सिंह सोनू ने पिछले पांच साल में खूब दहशत फैलाई। लगभग डेढ़ दशक तक वह अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा, लेकिन इन पांच साल के अंदर चौकाघाट में हिस्ट्रीशीटर अभिषेक सिंह प्रिंस सहित दो राहगीरों की हत्या, मिर्जापुर में आयरन फैक्ट्री मैनेजर की रंगदारी न देने पर हत्या, रोहनिया में जमीन कारोबारी एनडी तिवारी की हत्या कर मनीष ने अपना खौफ पैदा कर दिया था।

Most wanted criminal encounter in varanasi Manish was in fear for one and a half decade
बदमाश के पास से बरामद हथियार - फोटो : अमर उजाला

विवादित जमीन की पंचायत, असलहों की तस्करी और तमाम गैर कानूनी कार्यों को अंजाम देना उसका धंधा बन गया था। मनीष की तलाश में एसटीएफ और वाराणसी पुलिस पिछले तीन साल से ताबड़तोड़ छापामारी कर रही थी। इस बीच कई ऐसे मौके आए जब वह पुलिस के हत्थे चढ़ते-चढ़ते रह गया।

Most wanted criminal encounter in varanasi Manish was in fear for one and a half decade
घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और लोग। - फोटो : अमर उजाला
2007 में पहली बार लगा गैंगेस्टर एक्ट
पुलिस डोजियर के अनुसार मनीष सिंह ने पहली वारदात को अंजाम 2007 में कैंट इलाके में दिया था। हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोप में कैंट में उस पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद व्यापारी पर जानलेवा हमले मामले में 2007 में ही कोतवाली में भी मुकदमा दर्ज हुआ। 2007 में ही पहली बार मनीष पर कोतवाली पुलिस ने गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की।
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Most wanted criminal encounter in varanasi Manish was in fear for one and a half decade
वाराणसी: दो लाख का इनामी मुठभेड़ में ढेर - फोटो : अमर उजाला

2008 में पहली बार चौबेपुर में गोली मारकर हत्या को अंजाम दिया। साल 2009 में सीतापुर में असलहा के संग पकड़ा गया। शाहजहांपुर में व्यापारी को लूटने में 2008 में मुकदमा दर्ज हुआ था। भेलूपुर, फूलपुर, चौक, सिगरा, रोहनिया में लूट, रंगदारी, हत्या के प्रयास मामले में मुकदमे दर्ज होते गए। साल 2015 में लंका थाना में हत्या मामले में मनीष पर मुकदमा दर्ज किया गया।

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Most wanted criminal encounter in varanasi Manish was in fear for one and a half decade
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

इकलौती संतान था मनीष
मनीष अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। कक्षा आठवीं तक पढ़ाई के दौरान मां की मौत होने के बाद मनीष अपने पिता अनिल सिंह को छोड़कर मामा के घर उंदी चोलापुर चला गया। पहली घटना की रिपोर्ट मनीष के खिलाफ चोलापुर में दर्ज हुई। उसके बाद भेलूपुर में लूट के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। मनीष के आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने के बाद वह पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। मनीष 2015 के पंचायत चुनाव में अपने चचेरे भाई को चुनाव जितवाना चाहता था, लेकिन उस समय पुलिस के सक्रिय होने के कारण उसका गांव में सिंडिकेट नहीं चल पाया।
 

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