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विदेशों तक मशहूर है काशी की मलइयो का स्वाद, ओस की बूंदों से ऐसे होता है तैयार
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 04 Dec 2018 10:59 AM IST
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malaiyo
- फोटो : अमर उजाला
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काशी की पहचान बन चुका मलइयो का जायका सिर्फ ठंड के दिनों में ही लिया जा सकता है। इसकी भी अपनी वजह है। क्योंकि, ये खास मलइयो ओस की बूंदों से बनता है। जैसे जैसे ठंड बढ़ती है, इसकी खासियत भी बढ़ने लगती है। बनारस में पक्के महाल से लेकर चौक, मैदागिन, गोदौलिया, दशाश्वमेध, गिरजाघर चौराहे तक मलइयो की दूकानें सज गई हैं।
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वैसे तो इस दौर में अब दक्षिण के पकवान कश्मीर में मिलते हैं और पंजाब की लस्सी आसाम व सिक्किम में लेकिन मलइयो पर अब भी काशी का ही एकाधिकार है जो विदेशों तक मशहूर है। दूध से बनने वाली मलइयो की शुरुआत सैकड़ों साल पहले बनारस में ही हुई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
मलइयो को बनाने के लिए पहले कच्चे दूध को उबाला जाता है। उबले दूध को रात भर खुले आसमान में रख दिया जाता है ताकि इस पर ओस पड़ सके। भोर होते ही दूध को मथा जाता है।
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दूध को मथने के बाद निकलने वाले झाग में चीनी, केसर, पिस्ता, मेवा, इलायची मिलाकर मलइयो तैयार होती है और फिर उसे कुल्हड़ व मटकी में सजाकर पेश किया जाता है। ओस की वजह से ही मलइयो का झाग घंटों बना रहता है।