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आखिर क्यों कहते हैं ‘मैं जिंदा शहर बनारस हूं...’, जान लीजिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:53 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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‘जिसने भी छुआ वो स्वर्ण हुआ, सब कहें मुझे मैं पारस हूं, मेरा जन्म महाश्मशान मगर मैं जिंदा शहर बनारस हूं।’ शहर की खासियतों को बयां करतीं ये पंक्तियां लाहौरी टोला निवासी चंद्रशेखर गोस्वामी की हैं। वाकई, काशी न रुकती है न थमती है। न सोती है न अलसाती है। बस चलती रहती है। शहर की अलमस्ती और जिंदादिली के क्या कहने। कभी रात नहीं होती। मंगलवार आधी रात से भोर में तीन बजे तक शहर की जिंदगी को पीयूष तिवारी ने करीब से देखा। इस मौके की तस्वीरों को जावेद अली ने अपने कैमरे में कैद किया...। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
पक्का महाल की तंग गलियों से हाईमास्ट की पीली रोशनी में दमकते घाटों तक और फिर लंका में बीएचयू के सिंह द्वार से शहर की हृदयस्थली गोदौलिया-मैदागिन तक माहौल गुलजार और रौनक भरपूर। दूध, दही, लस्सी, मिठाई, चाय-पान, ठंडई से इडली-सांभर तक जो चाहिए, सब हाजिर। गोदौलिया की दूध सट्टी लग चुकी थी। मैदागिन पर मजदूर और चौक पर फूलों की मंडी में भी मोलभाव जोरों पर था। बीएचयू से लंका में तो जैसे रात में ही सुबह हो गई हो। कहीं छात्रों की टोलियां, कहीं आम लोगों की। अड़ीबाजों के अड्डे से घाटों की बैठकी तक चाय की चुस्कियों और मघई पान के बीड़े के साथ हर कहीं निखरते, संवरते नजर आए काशी के रंग-ढंग।
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- फोटो : अमर उजाला
आदमपुर पीलीकोठी
- रात 1:15 बजे
बुनकर बाहल्य क्षेत्र में बचाउ यादव की दुकान पर अड़ी जमी थी। कलीम अहमद, अनीसुर रहमान, इकबाल अहमद और अनवारूल हक चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति से लेकर अड़ोस-पड़ोस की घटनाओं पर चर्चा में जुटे थे। बचाउ ने बताया कि होली-दिवाली को छोड़कर पूरी रात लोग यहां आते-जाते रहते हैं।
- रात 1:15 बजे
बुनकर बाहल्य क्षेत्र में बचाउ यादव की दुकान पर अड़ी जमी थी। कलीम अहमद, अनीसुर रहमान, इकबाल अहमद और अनवारूल हक चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति से लेकर अड़ोस-पड़ोस की घटनाओं पर चर्चा में जुटे थे। बचाउ ने बताया कि होली-दिवाली को छोड़कर पूरी रात लोग यहां आते-जाते रहते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
विशेश्वरगंज
- रात 1:20 बजे
विशेश्वरगंज में बीच सड़क दो सांड़ आपस में गुत्थमगुत्था थे। आसपास की चाय-पान की दुकानें खुली थीं। लोग बेफिक्र दुकानों पर बैठे थे। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हुए आंदोलन के चलते जगह-जगह आवाजाही बाधित होने और माल की आवक प्रभावित होने की चर्चाएं चल रही थीं।
- रात 1:20 बजे
विशेश्वरगंज में बीच सड़क दो सांड़ आपस में गुत्थमगुत्था थे। आसपास की चाय-पान की दुकानें खुली थीं। लोग बेफिक्र दुकानों पर बैठे थे। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हुए आंदोलन के चलते जगह-जगह आवाजाही बाधित होने और माल की आवक प्रभावित होने की चर्चाएं चल रही थीं।
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- फोटो : अमर उजाला
मैदागिन
- रात 1:25 बजे
खान-पान की दुकानों पर भीड़ लगी थी, जैसे सुबह हो गया हो। चौराहे के गोलंबर पर तकरीबन पचास मजदूर बैठे थे। चंदौली, सैयदराजा से भी तमाम मजदूर आए थे। बताया कि जिन्हें मजदूरों की जरूरत होती है, वे यहां आते रहते हैं और काम मिलता रहता है। दुकानों पर जगह-जगह लोग चर्चाओं में मशगूल थे।
- रात 1:25 बजे
खान-पान की दुकानों पर भीड़ लगी थी, जैसे सुबह हो गया हो। चौराहे के गोलंबर पर तकरीबन पचास मजदूर बैठे थे। चंदौली, सैयदराजा से भी तमाम मजदूर आए थे। बताया कि जिन्हें मजदूरों की जरूरत होती है, वे यहां आते रहते हैं और काम मिलता रहता है। दुकानों पर जगह-जगह लोग चर्चाओं में मशगूल थे।