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Mahashivratri 2024: रंगभरी पर बाबा के भाल सजेगा गुलाल, महाशिवरात्रि पर काशी में आएंगे 6 लाख भक्त; करेंगे दर्शन

Sun, 25 Feb 2024 11:18 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 25 Feb 2024 11:18 AM IST
सार

Mahashivratri 2024 : मार्च महीने में भोले की नगरी काशी के चार बड़े त्योहार पड़ेंगे। आज से फाल्गुन की शुरुआत हो गई है। काशीवासी रंगभरी एकादशी पर बाबा के भाल पहला गुलाल लगाकर होली के हुड़दंग की अनुमति लेंगे। यह महीना काशीवासियों के लिए रंगों और खुशियों से भरा रहता है। 

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Mahashivratri 2024 Six lakh devotees will come to Kashi on Mahashivratri
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी में फाल्गुन महीने की अलग ही मस्ती होती है। इकलौता महीना होता है, जिसमें काशीवासी भगवान शिव के साथ होली खेलते हैं। मार्च में महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा।

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रंगभरी एकादशी पर बाबा के भाल पहला गुलाल लगाकर काशीवासी होली के हुड़दंग की अनुमति लेंगे। इसके साथ ही फिजाओं में होली के रंग घुल जाएंगे। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का विवाहोत्सव मनेगा। रंगभरी के दूसरे दिन बाबा के गण श्मशान में चिता भस्म की होली खेलेंगे।
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आठ मार्च को महाशिवरात्रि पर शिव की नगरी की रंगत कुछ और ही होगी। बाबा विश्वनाथ के धाम सहित शहर के शिवमंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्त आएंगे। इसकी तैयारियों में प्रशासनिक अफसर जुटे हैं। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव का साक्षी बनने के लिए काशी ही नहीं देश भर से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है। इस बार छह लाख से अधिक शिवभक्त बाबा दरबार में हाजिरी लगाएंगे।

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20 मार्च को रंगभरी एकादशी, पांच लाख भक्त आएंगे

रंगभरी एकादशी पर 20 मार्च को चार से पांच लाख भक्त बाबा दरबार में शीश नवाकर बाबा को पहला गुलाल चढ़ाएंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास से बाबा की पंचबदन प्रतिमा की पालकी निकलेगी। शिवभक्त बाबा की अगवानी में काशी की गलियों में गुलाल की होली खेलेंगे। विश्वनाथ गली अबीर-गुलाल की बौछार से लाल हो जाएगी। काशीपुराधिपति अपने नव्य-भव्य परिसर के स्वर्णिम गर्भगृह में माता पार्वती व प्रथमेश संग विराजेंगे।

25 मार्च को होली, देश-दुनिया से आते हैं श्रद्धालु
पुराणों में वर्णन मिलता है कि यही वह दिन है, जब बाबा विश्वनाथ माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे। जिस तरह होलाष्टक से ब्रज में होली उत्सव शुरू होता है, उसी तरह काशी में रंगभरी एकादशी से होली पर्व की शुरुआत होती है। रंगभरी के दूसरे दिन मशान पर चिता भस्म की होली खेली जाएगी। चिता भस्म की होली देखने के लिए देश के कई राज्यों से श्रद्धालु बनारस आते हैं। इसके साथ ही होली का हुड़दंग काशी में शुरू हो जाएगा और होली 25 मार्च को खेली जाएगी। होली खेलने के लिए देश ही नहीं दुनिया के कई देशों से श्रद्धालु बनारस आते हैं।
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