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मधुबनी कला को सहेज रही मिथिला की बेटी, पिता की मौत के बाद उठाया सशक्त कदम

Tue, 25 Jun 2019 04:33 PM IST
Sayali Maurya पूजा सिंह,अमर उजाला,वाराणसी
पूजा सिंह,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Tue, 25 Jun 2019 04:33 PM IST
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Madhubani art from mithila by bahinapa foundation in varanasi

मधुबनी पेंटिंग भारत और विदेशों में सबसे प्रसिद्ध कलाओं में से एक है। मधुबनी कला मिथिलांचल क्षेत्र जैसे बिहार के दरभंगा, मधुबनी और नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। शुरू में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवारों और कागजों पर उतर आई है। तस्वीरें देखें आगे की स्लाइड्स में...

Madhubani art from mithila by bahinapa foundation in varanasi

मिथिला की औरतों द्वारा शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला का काशी में भी काफी क्रेज है। मिथिला की बेटी वाणी इसके संरक्षण के साथ ही नए हुनर को मंच देने का कार्य कर रही हैं।

Madhubani art from mithila by bahinapa foundation in varanasi
वाणी - फोटो : अमर उजाला

वाणी को यह कला सीखने की ललक हमेशा से थी, लेकिन पढ़ाई के लिए बाहर रहने के कारण इस कला को कभी सीख नहीं पाई। मिथिला की वाणी शादी के बाद बनारस आ गई, लेकिन गर्मी की छुट्टियों में मायके जाकर इस कला को सीखना शुरू किया। इसके बाद वाणी ने मिट्टी के घड़े, साड़ी, सूट, वॉल पर चित्रकारी करना शुरू किया। बनारस में हुए मिथिला मिलन समारोह ने उनकी इस कला को पहचान दिलाई। 

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Madhubani art from mithila by bahinapa foundation in varanasi
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पिता की मृत्यु के बाद वाणी ने इस कला से अपनी मां और बेटी को भी जोड़ा। इनके द्वारा साड़ी, कुर्ती, दुपट्टा, टाई, वॉल हैंगिंग और सजावटी समानों पर कि गई मधुबनी चित्रकारी बनारस, इलाहाबाद, कर्नाटक, लखनऊ तक पहुंच रहे हैं। इस कला के संरक्षण के उद्देश्य से वाणी ने मार्च 2019 में सखी बहिनपा फाउंडेशन की स्थापना की। जिससे आब तक 16 महिलाएं जुड़ चुकी है।

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Madhubani art from mithila by bahinapa foundation in varanasi

क्या है मधुबनी कला :
मधुबनी चित्रकारी को मिथिला की कला भी कहा जाता है। इसकी विशेषता चटकीले और विषम रंगों से भरे गए रेखा चित्र या आकृतियां हैं। ये चित्र अपने आदिवासी रूप और चटकीले और मटियाले रंगों के प्रयोग के कारण लोकप्रिय हैं। इसमें खनिज रंजकों का प्रयोग किया जाता है।

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