लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले ही तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहे दल आखिरी दौर तक उम्मीदवार ही तय नहीं कर पाए। हर बड़ा दल दूसरे दल और गठबंधन की ओर देखता रहा, फिर भी उन्हें अपनी-अपनी पार्टियों में चुनाव लायक प्रत्याशी नहीं मिले। जिसका ताजा उदाहरण है मोदी के खिलाफ खड़ी सपा प्रत्याशी शालिनी यादव और तेज बहादुर, जिनका आखिरी मिनट में टिकट की अदला बदली हुई। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
सिर्फ सपा ने ही नहीं बदले आखिरी मिनट में प्रत्याशी, दलबदलुओं को टिकट देने में ये दल भी नहीं है पीछे
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भाजपा ने भदोही से वीरेंद्र सिंह मस्त का टिकट पहली ही सूची में काट दिया था लेकिन उनकी जगह प्रत्याशी तय करने में पसीने छूट गए। अंतत: टिकट चुनाव से ठीक पहले बसपा से निष्कासित रमेश बिंद को दे दिया। बिंद मिर्जापुर के मंझवा से तीन बार बसपा से विधायक रह चुके हैं। उनकी पत्नी समुद्रा देवी 2014 में मिर्जापुर से बसपा की टिकट पर दूसरे स्थान (2,17,457) पर रही थीं। इसी तरह भाजपा ने मछलीशहर सीट से बीपी सरोज को उम्मीदवार बना दिया। सरोज को 2014 में बसपा के टिकट पर 2,66,055 वोट मिले थे, जबकि उन्हें हराने वाले रामचरित्र निषाद ने 438210 वोट पाए थे।
रामचरित्र निषाद को सपा ने भाजपा छोड़ते ही मिर्जापुर से प्रत्याशी बना दिया। पूर्व घोषित प्रत्याशी राजेंद्र एस बिंद को प्रचार को परवान चढ़ाने के बाद बैठा दिया गया। चंदौली सीट पर भी सपा नेतृत्व स्थानीय नेताओं पर भरोसा जताने के बजाय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के प्रमुख डॉ. संजय चौहान को लड़ा रहा है। 2014 में सपा-बसपा के प्रत्याशियों अनिल मौर्य और रामकिशुन यादव को मिलाकर 4,61,524 वोट हासिल हुए थे, जबकि इस बार भी उम्मीदवार भाजपा के डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को 4,14,135 मत मिले थे।
दूसरी तरफ आजमगढ़ सीट से चार बार सांसद रहे रमाकांत यादव को जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह राजनीतिक छांव के लिए कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें भदोही से टिकट थमा दिया। रमाकांत को 2014 में आजमगढ़ से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर 2,77,102 वोट मिले थे। मुलायम सिंह यादव से वह 63,204 वोट से हारे थे। कांग्रेस ने घोसी सीट पर भी बसपा से निष्कासित पूर्व सांसद बाल कृष्ण चौहान पर दांव लगा दिया। चौहान इस सीट से घोषित प्रत्याशी अतुल राय का विरोध कर रहे थे।
चुनावी मौसम में चंद दिन पहले कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुईं शालिनी यादव के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। 2017 में कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी के तौर पर शालिनी ने 1,13,345 वोट पाए थे। अचानक उन्होंने दलबदल किया। सपा प्रत्याशी साधना गुप्ता को 99,272 और बसपा की सुधा चौरसिया को 28,959 वोट मिले थे। इन्हीं वोटों के साथ-साथ कांग्रेस में सेंधमारी की खातिर सपा ने भी उन्हें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन का उम्मीदवार घोषित कर दिया लेकिन सोमवार को सपा ने बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव को अधिकृत उम्मीदवार बना दिया। फिलहाल, जिला निर्वाचन अधिकारी के यहां सपा से दो-दो दावेदार हैं। दो मई को नाम वापसी के बाद ही पता चलेगा कि सपा में शामिल होने का शालिनी को आखिरकार क्या सिला मिला?