काशी को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने की योजना के तहत काम चल रहे हैं। दिसंबर 2021 तक इन योजनाओं के काम पूरे हो जाएंगे। कुछ योजनाएं दिसंबर 2020 में पूरी होने वाली थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब यह मार्च 2021 में पूरी होंगी। योजनाओं पर 1000 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। देखें अगली स्लाइड्स...।
मार्च तक अपनी काशी होगी और स्मार्ट, लोगों को मिलेंगी ये करोड़ों की सौगातें
पुराने शहर को सुरम्य, संयोजित, निर्मल व एकीकृत बनाया जा रहा है। स्मार्ट सिटी योजना के लिए बनारस के नौ क्षेत्रों में काम चल रहा है। बाबा विश्वनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्रों को ही लोगों ने प्राथमिकता दी थी, जिसके आधार पर इस क्षेत्र का चयन किया गया। समूचे बनारस में ई-गवर्नेंस और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट को प्राथमिकता के तौर पर लागू किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी का हिस्सा समूचे शहर को नई सुविधाओं से लैस करेगा।
घाटों व मंदिरों के पुनरुद्धार, पेयजल व बिजली की निर्बाध आपूर्ति, कूड़ा प्रबंधन और नदी मार्ग को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। क्षेत्र के चिह्नित पार्क, कम जगह में मल्टी लेवल पार्किंग, कल्चर कम कन्वेंशन सेंटर, और टाऊन हाल को स्मार्ट बनाया जाएगा। क्षेत्र में शिल्पी हाट, सेंटर आफ एक्सलेंस विद हाल ऑफ फेम, लाइट एंड साउंड शो, नाइट बाजार के साथ पुराने जलाशयों व पोखरों का पुनरुद्धार होगा।
स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे कार्य की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है। कई योजनाएं मार्च में पूरी हो जाएंगी। पिछले दिनों शहरी विकास मंत्रालय के सचिव डीएस मिश्रा ने इनका निरीक्षण कर कमियों को दूर कराने का निर्देश दिया था। जिसके आधार पर काम कराया जा रहा है। - गौरांग राठी, सीईओ स्मार्ट सिटी
योजना का हाल
गौदौलिया चौराहे पर पार्किंग
21.17 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पार्किंग का 75 प्रतिशत काम हो गया है। इसके बनने से वाहनों के पार्किंग की समस्या का समाधान होगा।
छह वार्डों का कायाकल्प :
85.33 करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे गार्डों को माडल के रूप में विकसित किया जाएगा अब तक 30 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उसी के आधार पर अन्य वार्डों का कायाकल्प होगा।
घाटों की मरम्मत :
11.88 करोड़ रुपये की लागत से घाटों को सुंदर बनाया जा रहा है। अब तक 45 प्रतिशत काम हो गया है। इसके बन जाने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
एडवांस कैमरे : 128.04 करोड़ रुपये की लागत से एडवांस कैमरे लगाए जाएंगे। इससे दूर से ही नंबर प्लेट और व्यक्ति की पहचान करने में आसानी होगी। अब तक 47 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।