भारतवर्ष के मूर्धन्य वैदिक विद्वान प्रातःस्मरणीय सम्राट श्रीकृष्णशास्री गोडशे गुरुजी की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वेदब्रह्मश्री कै. विश्वनाथ गुरुजी आळंदी और दंडक्रम पारायणकर्ता की कै. पूज्य माता को समर्पित आयोजन किया गया।
2 of 11
बच्चों ने भी दिखाई अपनी सहभागिता।
- फोटो : मंदिर प्रशासन
काशी के इतिहास में प्रथम बार श्रुतिस्मृति ज्ञान मंदिर वेद पाठशाला अहिल्या नगर महाराष्ट्र ने 14 अक्टूबर 2025 से 30 नवम्बर तक राम घाट स्थित सुप्रसिद्ध श्रीवल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय में पद्मश्री परमपूज्य गणेश्वरशास्री द्राविड़ गुरुजी श्रीराम मंदिर अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निर्णय कर्ता एवं पूज्य विश्वेश्वर शास्री द्राविड़ के पावन सान्निध्य में वेदमूर्ति देवेंद्र रामचंद्र गढ़ीकर के मुख्य नेतृत्व में वेदमूर्ति महेश चंद्रकांत रेखे घनपाठी के सुपुत्र वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी द्वारा अत्यंत कठिन शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा का एकाकी सम्पूर्ण कंठस्थ दण्ड क्रम पारायण किया गया।
3 of 11
ढोल-नगाड़ों पर दिखा जोश।
- फोटो : मंदिर प्रशासन
वैदिक मौखिक परंपरा में आठ विकृतियों में ‘दंडक्रम’ सर्वाधिक कठिन, सुसंगठित एवं विलक्षण विधि है। इसमें वैदिक मन्त्रों का विशेष अनुलोम-विलोम- क्रम एवं स्वरानुसार पाठ किया जाता है, जिससे वेदवाणी की अक्षुण्णता एवं पवित्रता यथावत् बनी रहती है।
4 of 11
युवाओं ने दिखाई सहभागिता।
- फोटो : मंदिर प्रशासन
इस आयोजन का एक अन्य विशेष आयाम यह है कि महेश चन्द्रकान्त रेखे स्थापित वेदपाठशाला की तपःपूर्ति वर्ष स्मृति में, उनके सुपुत्र चि. देवव्रत महेश रेखे द्वारा काशी के इतिहास में पहली बार इस जटिल विधि का दण्डक्रम पारायण मात्र 19 वर्ष के आयु मे किया गया जो गुरुशिष्य परम्परा के अनुपम समर्पण एवं साधना का प्रतीक है।
5 of 11
मंत्रों से गूंजा काशी विश्वनाथ धाम परिसर।
- फोटो : मंदिर प्रशासन
आयोजन के समापन दिवस पर आज श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजक मंडल संस्था ने विशिष्ट सांस्कृतिक संगीतमय उत्सव का आयोजन भी किया। समान उत्सव कार्यक्रम में आज श्री काशी विश्वनाथ धाम का प्रांगण “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा।