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Kashi: कोई दिव्यमहल में जन्मा, किसी को मिला भारतरत्न, वे 24 लोग... जिन्होंने काशी को काशी बनाया; जानें इन्हें

Mon, 05 May 2025 03:10 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 05 May 2025 03:10 PM IST
सार

काशी नगरी में अनेक ऐसे लोगों ने जन्म लिया है, जिनका नाम आज विश्व पटल पर छाया हुआ है। समय-समय पर उन्हें और उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद किया जाता है। इनके काम ने दुनियाभर में शोहरत हासिल की।

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Kashi nagari gautam buddha kabirdas tulsidas ravidas madan mohan malviya jaishankar munshi premchand
शीतला घाट पर की गई गंगा आरती। - फोटो : अमर उजाला

साहित्य, संस्कृति, संगीत और राजनीति में काशी की गहरी छाप है। इनमें से 24 प्रख्यात लोगों की जानकारी दे रहे हैं।  यहां पद्मश्री और पद्मभूषण की गली है, जहां सम्मान पाने वाले रहते हैं। भारत रत्न पाने वाले विभूतियों की संख्या भी अच्छी है। 



गौतम बुद्ध : काशी के सारनाथ में गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इनके नाम पर बौद्ध ही धर्म है। दुनियाभर से लोग सारनाथ अस्थियों के दर्शन-पूजन करने आते हैं।

भगवान पार्श्वनाथ : पचास हजार जैनियों की आबादी वाले इस शहर में 24 में से चार तीर्थंकरों का जन्मस्थान होना बहुत ही खास है। इनमें 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जैन तीर्थ का जन्मस्थान सबसे खास है। भेलूपुर में 2880 साल पहले काशी के महाराज अश्वसेन के दिव्यमहल में उनका जन्म हुआ।

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गंगा आरती के अवसर पर जुटी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला

संत कबीरदास : काशी के लहरतारा में जन्मे संत कबीरदास ने जाति और धर्म के बंधन को तोड़ने का काम किया। वे निर्गुण शाखा के ज्ञानमार्गी उपशाखा के महानतम कवि थे। कबीर पंथ संप्रदाय की नींव भी रखी।

रामानंदाचार्य : प्रयागराज में जन्मे रामानंदाचार्य ने काशी में शिक्षा प्राप्त की और प्रकांड विद्वान बनें। पंचगंगा घाट पर श्रीमठ में रामनंदी संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय के लोगों की मूल प्रधान पीठ यहीं है।

गोस्वामी तुलसीदास : तुलसीदास ने संकटमोचन मंदिर की स्थापना की। उनके नाम पर काशी में तुलसीघाट है। उन्होंने बाबा विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा को रामचरित मानस सुनाया और रामचरित मानस की रचना भी की। उन्होंने रामलीला की शुरुआत की थी।

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खूब हुई आतिशबाजी। - फोटो : अमर उजाला

संत रैदास : काशी के सीरगोवर्धन में जन्मे रैदास ने रविदासिया पंथ की स्थापना की थी। इन्होंने जाति का खंडन किया था। लोगों को आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया था। रैदास की मन चंगा तो कठौती में गंगा जैसी रचना प्रचलित है।

पं. रविशंकर : प्रख्यात सितारवादक पंडित रविशंकर ने भारतीय संगीत को दुनियाभर में सम्मान दिलाने का काम किया। भारतीय संगीत और पाश्चात्य संगीत को एक करने में भूमिका निभाई। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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भक्तों की जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय : काशी को कर्मभूमि बनाने वाले महामना ने काशी हिंदू विवि की स्थापना की। उन्होंने सत्यमेव जयते को भारत का राष्ट्रीय उद्घोष वाक्य बनाने का सुझाव दिया था। सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया।

महाकवि जयशंकर प्रसाद : काशी के हिंदी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद ने हिंदी काव्य में छायावाद की स्थापना की। खड़ी बोली हिंदी काव्य की निर्विवाद सिद्ध भाषा बन गई। पद्मावत उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।

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गंगा आरती में शामिल भक्त। - फोटो : अमर उजाला

मुंशी प्रेमचंद : काशी में जन्मे मुंशी प्रेमचंद हिंदी, उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार और विचारक थे। उनके साहित्य सामाजिक, सांस्कृतिक दस्तावेज हैं। उन्होंने साहित्य के हर पहलु को अपनी रचनाओं में समेटा।

भारतेंदु हरिश्चंद्र : काशी में जन्मे आधुनिक हिंदी के पितामह कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र ने साहित्य और हिंदी को बढ़ावा दिया। आधुनिक हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। काशी के विद्वानों ने इन्हें भारतेंदु की उपाधि दी थी।

चंद्रशेखर आजाद : चंद्रशेखर पहली और आखिरी बार काशी में गिरफ्तार हुए थे। मजिस्ट्रेट ने इनसे नाम पूछा तो उन्होंने बताया आजाद। बस यहीं से उनका नाम आजाद पड़ गया। संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई के दौरान क्रांतिकारी बने थे।

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