गंगा सप्तमी पर गंगा का किनारा मां गंगा के जयकारों और मंत्रों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां गंगा को आरपार की माला और 72 साड़ियां अर्पित कीं। चुनरी यात्रा में ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने मां गंगे के जयकारे के उद्घोष के बीच दशाश्वमेध घाट तक मां गंगा के प्रकट होने की स्मृति को जीवंत कर दिया।
शनिवार की शाम को मोक्षदायिनी मां गंगा के प्राकट्य की स्मृति में गंगोत्री सेवा समिति और शनिवार गोष्टी की ओर से गंगा सप्तमी मनाई गई। 25 साल से अनवरत चली आ रही पूजन की परंपरा निभाई गई। वैशाख शुक्ल सप्तमी पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ आयोजन की शुरुआत अपराह्न 5 बजे चित्तरंजन पार्क से विशाल चुनरी शोभायात्रा के साथ हुई।
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Ganga Aarti varanasi
- फोटो : अमर उजाला
महिलाएं कलश लेकर और भक्तगण पारंपरिक परिधान में शोभायात्रा में शामिल हुए। दशाश्वमेध घाट पर पहुंचकर चुनरी को गंगा मां को अर्पित किया गया और आरपार की माला चढ़ाई गई। घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन और दीपदान किया गया। जनसमूह आस्था के लहरों में श्रद्धा की डुबकी लगा रहा था।
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गंगा महिमा पर हुआ विमर्श, पांच गंगासेवियों को किया गया सम्मानित
आयोजन के दूसरे चरण में गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें मां गंगा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर वक्ताओं ने विचार रखे। गोष्ठी की अध्यक्षता अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी विवेक शंकर तिवारी ने भाग लिया। इस अवसर पर गंगा सेवा में सक्रिय पांच गंगासेवियों को सम्मानित किया गया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झलकी लोक और आध्यात्मिक परंपरा
गोष्ठी के बाद घाट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बनारस की लोक कला, शास्त्रीय संगीत और भक्ति नृत्यों की प्रस्तुति हुई। स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ युवाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
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केदारघाट पर भी गूंजा जय गंगे का जयघोष
गंगा पूजन का एक अन्य केंद्र रहा केदारघाट भी रहा। गंगोत्री सेवा समिति की ओर से पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता पंडित संदीप दुबे सोनू ने की। मंत्रोच्चार, पुष्पांजलि, दीपदान और श्रद्धालुओं की सहभागिता से घाट का माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। स्थानीय श्रद्धालुओं और युवाओं ने इस अवसर पर घाट की सफाई और गंगा संरक्षण का संकल्प भी लिया।