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गुरुकुल परंपरा का जीवंत उदाहरण है काशी का यह मठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 28 Sep 2018 06:05 PM IST
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जंगमबाड़ी मठ
काशी में एक ऐसा मठ है जहां गुरुकुल परंपरा अभी भी जिंदा है। इसे काशी का सबसे प्राचीन मठ माना जाता है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
varanasi
इस मठ में बटुकों को ज्ञान मिलता है और दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सुविधा भी मिलती है। ये सब देश की गुरुकुल परंपरा को जीवंत रखता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं श्रद्धालु
जंगमबाड़ी मठ
मठ के मंहत ने बताया कि वर्ष 1918 में जगदगुरु विश्वराध्य गुरुकुल की स्थापना वीर शैव धर्म के पांच पीठों के आचार्यों की देख रेख में हुई।
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इस मठ के बारे में कहा जाता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं। मठ में शिवलिंग के रूप में पूर्वजों को स्थापित करने की परंपरा है। लोग शिवलिंग के रूप में पूर्वजों को स्थापित कर उनकी पूजा करते हैं।
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जंगमबाड़ी मठ
काशी के जंगमबाड़ी मठ के सौ साल पूरा होने पर शतमानोत्सव पर्व मनाया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे। वहां उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि गुरुकुल परंपरा का जीवंत उदाहरण है।