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तस्वीरें : जगन्नाथ पुरी में तब्दील हुई काशी, भक्तों ने लगाई परिक्रमा, लक्खा मेले की हुई शुरुआत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Sayali Maurya
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:04 AM IST
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जगन्नाथ रथयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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पुराधिपति की नगरी काशी गुरुवार को जगन्नाथ पुरी बन गई। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भइया बलभद्र भोर में रथ पर सवार होकर काशी वासियों को दर्शन देने निकले। भक्तों ने प्रभु का दरस, रथ का परस और परिक्रमा की। देव विग्रहों की पीतांबर झांकी सजाई गई, मंगला आरती के साथ पट खुले और काशी में उत्सव श्रृंखला का पहला लक्खा मेला रथयात्रा भक्तों के लिए सज गया। तस्वीरें देखें आगे की स्लाइड्स में...
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दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
अष्टकोणीय रथ पर भगवान जगन्नाथ ने कुटुंब के साथ भक्तों को दर्शन दिए। पट खुलने से पहले ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भोर में दर्शन करने आए भक्तों में हाथों में तुलसीदल के साथ ही विविध प्रकार के सुगंधित पुष्पों की माला भी थी। गुरुबाग से महमूरगंज के बीच का इलाका मेला क्षेत्र में तब्दील हो गया है।
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गुरुवार को शुभ मुहूर्त में मंगला आरती के बाद भक्तों ने विभोर मन से भगवान का अष्टकोणीय रथ दो डग खींचा और पुण्य के भागी बने। इसके साथ ही दर्शन के लिए कपाट खुले और भगवान जगन्नाथ की जय, भइया बलभद्र की जय, व सुभद्रा जी की जय के उद्घोष से क्षेत्र गूंज उठा। भगवान जगन्नाथ को भक्त तुलसी की माला और नान खटाई का भोग लगा रहे थे।
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वहीं कोई परवल की मिठाई, केसरिया पेड़ा, राजभोग तो कोई आम भक्ति भाव से अर्पित कर रहा था। गुलाब, कमल और बेला के फूलों से सजा अष्टकोणीय मंदिर की आकृति वाला दो टन वजनी लकड़ी का रथ दूर से ही भक्तों को आकर्षित कर रहा था। प्रभु समेत तीनों देव विग्रहों को परंपरा के अनुसार 14 पहिए वाले 20 फीट चौड़े व 18 फीट ऊंचे अष्ट कोणीय रथ पर आधी रात में विराजमान कराया गया।
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ससुराल में प्रथम दिनी श्रृंगार के क्रम में भगवान जगन्नाथ, अग्रज बलभद्र व बहन सुभद्रा को पीतांबर धारण कराया गया। विभिन्न प्रकार के पीले फूलों से श्रृंगार कर झांकी सजाई गई। भोर 5:11 बजे पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने भगवान गणपति देव व शालिग्राम की पूजा-अर्चना और तीनों विग्रहों का विशेष पूजन-अनुष्ठान किया।
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