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आसाराम की सजा पर बनारस में जमकर बजे ढोल नगाड़े, संतों ने किया फैसले का स्वागत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 26 Apr 2018 07:57 AM IST
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जोधपुर कोर्ट में नाबालिग से बलात्कार के दोषी आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद काशी में मिलाजुला माहौल रहा। संत समाज ने न्यायपालिका के इस कदम का स्वागत किया है। कांग्रेस सेवादल के सदस्यों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए जमकर खुशियां मनाईं। वहीं आसाराम के शिष्यों और कुछ धार्मिक संस्थाओं ने अभी भी आस नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि आसाराम दोषी नहीं हैं और वह जल्द रिहा होंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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आसाराम पर फैसला आने के बाद कांग्रेस सेवादल के नेता और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया। कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष हरीश मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से ढोंगी एवं बलात्कारी बाबा आसाराम को न्यायपालिका ने उम्रकैद की सजा सुनाते हुए जेल भेजा है, उससे देश में न्यायप्रणाली को लेकर गहरी आस्था का भाव पनपा है।
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अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी महाराज ने सजा के फैसले पर कहा कि जो जस करहि सो तस फल चाखा, कर्म प्रधान विश्व रच राखा। जो जैसा कर्म करता है उसे तो उसका फल भोगना ही पड़ता है। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास का कहना है कि न्यायपालिका के निर्णय का हम सभी सम्मान करते हैं। जो जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है। न्याय तो सभी के लिए बराबर होता है। संत विचारों और साधना से बनता है।
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हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने कहा कि हम लोग आसाराम बापूजी को न्याय दिलाने के लिए लडते रहेंगे। न्यायालय का यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है । इस निर्णय से उच्च न्यायालय में न्याय मांगने का उनका अधिकार समाप्त नहीं हुआ है। सनातन संस्था के चेतन राजहंस का कहना है कि आसाराम बापू को न्याय दिलाने के लिए हम लोग उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय में भी जा सकते हैं ।
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Asaram
जोधपुर कोर्ट से नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले आसाराम के खिलाफ यूपी के भदोही में भी मुकदमा दर्ज है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मामला तब दर्ज हुआ था जब 2012 में आसाराम सत्संग के सिलसिले में भदोही आया था।