वाराणसी के ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान सामने आए शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने शुक्रवार को अपना आदेश टाल दिया है। कार्बन डेटिंग पर जिला जज की अदालत ने खुद सवाल उठाया और कहा कि कही इससे शिवलिंग का क्षरण तो नहीं होगा। इस पर चार महिला वादियों ने वैज्ञानिक पद्धति से जांच कराने की मांग की। इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने समय की मांग की। अब मामले की अगली सुनवाई 11 अक्तूबर को होगी।
मुस्लिम पक्ष का प्रति उत्तर सुनने के बाद अदालत अपना आदेश सुना सकता है। उस दिन अदालत पहले मुस्लिम पक्ष को सुनेगी। इसके बाद ही अदालत का आदेश आ सकता है।श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन मामले में कुल पांच वादी महिलाएं हैं, जिनमें से चार वादी महिलाओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने सर्वे के दौरान सामने आए शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की मांग के लिए याचिका दी थी।
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वाराणसी कोर्ट के बाहर का नजारा
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ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण के मामले में 16 मई को सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग के मुद्दे पर जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने वादी लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन व सुभाष नंदन चतुर्वेदी से यह स्पष्ट करने को कहा कि कार्बन डेटिंग की जांच का मुद्दा वाद का विषय है या नहीं।
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वाराणसी कोर्ट के बाहर वादी महिलाएं
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अदालत में इस पर दोनों अधिवक्ताओं ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सर्वे के दौरान मिला शिवलिंग पहले अप्रत्यक्ष यानि अदृश्य था। सर्वे के दौरान वजूखाने के हौज से पानी हटने के बाद शिवलिंग प्रत्यक्ष यानि दृश्य हो गया।
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अदालत के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
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विष्णु जैन ने कार्बन डेटिंग के मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि हमने शिवलिंग को बिना क्षति पहुंचाये, उसके इर्द-गिर्द की कार्बन डेटिंग की मांग की है। शिवलिंग की वैज्ञानिक व राडार पद्धति से जांच कराई जाए। इस पर जवाब देने के लिए अंजुमन इंतजमिया मसाजिद कमेटी ने समय मांगा। इसके बाद अदालत ने 11 अक्तूबर की तिथि नियत कर दी।
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अदालत परिसर के बाहर खड़े अधिवक्ता
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कार्बन डेटिंग की मांग का विरोध कर रही वादी राखी सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने अदालत में कहा कि कोर्ट को यह तय करना है कि बरामद आकृति शिवलिंग है या फव्वारा। उन्होंने कहा, न्यायालय यह तय करे कि कार्बन डेटिंग की जांच का मामला वाद का विषय है या नहीं। उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि अंजुमन इंतजामिया ने इस मामले में आपत्ति दाखिल की है, ऐसे में वाद बिंदु तय कर सुनवाई शुरू की जाय।