प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के मिलन का अद्भुत क्षण, मानों समय थम गया हो। लोगों की निगाहें बीच मंच पर ही टिक गई हों। 14 वर्ष बाद चारों भाइयों को गले मिलते देख लाखों लीलाप्रेमियों के नयन सजल हो गए। मौका था लक्खा मेले में शुमार विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप का। श्रीचित्रकूट रामलीला कमेटी काशी द्वारा आयोजित भरत मिलाप की अद्भुत झांकी देखने के लिए नाटी इमली का भरत मिलाप मैदान, आसपास के घर पूरी तरह दर्शनार्थियों से पटे रहे। नाटी इमली का मैदान भगवान राम और भरत के मिलाप के 479 साल की लीला का साक्षी बना।
गोधूली बेला में मर्यादा और त्याग का महामिलन देखकर नर-नारायण के नयन छलक उठे। क्षण भर की लीला में चारों भाइयों के मिलन का साक्षी बनने को जन-जन आतुर था। गुरुवार शाम भक्ति का भाव ऐसा छाया कि काशी में अयोध्या ही उतर आई। हर तरफ स्वत: प्रणाम मुद्रा में जुड़े श्रद्धालुओं के हाथ अपरंपार आस्था की कहानी खुद-ब-खुद बयां कह रहे थे।
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विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली का भरत मिलाप
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद नाटी इमली के मैदान में श्रद्धा और करुणा का ज्वार ऐसा उठा कि भगवान इंद्र भी खुद को रोक नहीं पाए। हल्की-हल्की फुहारों के बीच लीला आरंभ हुई। परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े, नव राजीव नयन जल बाढ़े...। भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे हैं। कृपासिंधु भगवान राम ने उन्हें उठाकर हृदय से लगा लिया। इसके साथ ही चारों भाइयों का भावपूर्ण मिलन देख श्रद्धालु भावुक हो उठे।
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विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली का भरत मिलाप
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विश्व विख्यात भरत मिलाप का आंखों देखा हाल आकाशवाणी के वाराणसी केंद्र से प्रसारित किया गया। लीला स्थल पर स्थापित दो कमेंट्री स्थलों में मुख्य लीला स्थल से पूर्व कुलपति प्रो. राममोहन पाठक और आकाशवाणी उद्घोषक पांडुरंग पुराणिक भरत मिलाप का जीवंत प्रसारण किया।
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विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली का भरत मिलाप
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वहीं, लीला के पहले ही नाटी इमली जाने वाले सभी मार्गों को बंद कर दिया गया था। बैरिकेडिंग के कारण अपने घर जाने वालों को सड़कों का चक्कर काटना पड़ा। बाइक तथा दूसरे वाहनों को भी अनुमति नहीं थी। मेले में भीड़ ज्यादा होने के कारण चार बजे के बाद से सभी का प्रवेश बंद कर दिया गया था।
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विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली का भरत मिलाप
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श्री चित्रकूट रामलीला में भरत मिलाप का दृश्य हर किसी को भ्रातृ प्रेम से भर गया। जैसे ही राम और लक्ष्मण को भरत व शत्रुघ्न ने देखा तो वह नंगे पैर ही उनकी ओर दौड़ पड़े। नेमियों ने प्रभु की राह में फूल बिछाए और मिलन की नयनाभिराम झांकी को आंखों में संजोने लगे। जैसे ही भगवान श्रीराम ने भरत को और लक्ष्मण ने शत्रुघभन को अपने गले से लगाया तो चारों दिशाओं में जय सियाराम और हर-हर महादेव का जयकारा गूंज उठा।