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प्रकाशोत्सव पर सज गया गुरुद्वारा: 500 साल पहले काशी आए थे गुरुनानक देव, गुरु चरणों की रज से बाग हो गया गुरुबाग

Fri, 19 Nov 2021 09:48 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 19 Nov 2021 09:48 AM IST
सार

श्री गुरुनानक देव महाराज का 552वां प्रकाशोत्सव आज मनाया जाएगा। गुरुद्वारों में गुरुवार शाम से ही अखंड कीर्तन आरंभ हो गए और विद्युत झालरों से सजावट की गई है। मुख्य ग्रंथी भाई बलजीत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे को विदेशी फूलों से सजाया गया है।

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Gurudwara decorated on the festival of lights: 500 years ago, Guru Nanak Dev came to Kashi Gurubagh became a garden due to grace of Guru feet
प्रकाशोत्सव पर सज गया गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला।

गुरु चरणों की रज का ही प्रभाव था कि काशी का बाग आज गुरुबाग के नाम से जाना जाता है। सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने गुरुबाग में 500 साल पहले जो परंपरा चलाई वह आज भी अनवरत जारी है। देश भर में जहां-जहां सिख गुरुओं के चरण पड़े, वहां सभी स्थानों पर गुरुद्वारों का निर्माण किया गया। बनारस में भी गुरुनानक देव की आगमन स्थली पर गुरुद्वारा गुरुबाग और नवम पातशाह गुरु तेगबहादुर सिंह व गुरुगोविंद सिंह की आगमन स्थली पर गुरुद्वारा बड़ी संगत नीचीबाग सिख समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है।



गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्य ग्रंथी बलजीत सिंह ने बताया कि फरवरी 1507 में शिवरात्रि के अवसर पर गुरु नानक देव ने काशी की यात्रा की थी। वर्तमान गुरुबाग स्थित गुरुद्वारे के स्थान पर उस समय यहां सुंदर बाग था। इसी स्थान पर गुरु नानक देव शबद-कीर्तन कर रहे थे, जिससे प्रभावित होकर बाग के मालिक पंडित गोपाल शास्त्री उनके शिष्य बन गए। गुरु नानक देव के आकर्षक प्रभाव से पूरी नगरी में उनकी जय-जयकार होने लगी।

Gurudwara decorated on the festival of lights: 500 years ago, Guru Nanak Dev came to Kashi Gurubagh became a garden due to grace of Guru feet

उन्हीं दिनों कई विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित करने वाले पंडित चतुरदास ईर्ष्यावश गुरु नानक देव के पास पहुंचे। इस पर गुरु नानक ने मुस्कुराते हुए स्वयं कहा कि पंडित चतुरदास जी यदि आप को मुझसे कुछ प्रश्न करने हैं तो इस बाग के भीतर एक कुत्ता है, आप उसे यहां लाइए, वही आपके प्रश्नों का उत्तर देगा। हम इस वाद-विवाद के झमेले में पड़ना नहीं चाहते। गुरुजी का इशारा पाकर पंडित जी कुछ ही दूर गए थे कि उन्हें कुत्ता मिला, जिसे वे लेकर आए।

Gurudwara decorated on the festival of lights: 500 years ago, Guru Nanak Dev came to Kashi Gurubagh became a garden due to grace of Guru feet

गुरु नानक देव ने जब उस पर दृष्टि डाली तो कुत्ते के स्थान पर सुंदर स्वरूप धोती, जनेऊ, तिलक, माला आदि धारण किए एक विद्वान बैठा नजर आया। लोगों के पूछने पर उसने बताया कि मैं भी एक समय विद्वान था, लेकिन मेरे भीतर ईष्या व अहंकार भरा हुआ था। काशी में आने वाले सभी साधु, संत, महात्मा, जोगी, सन्यासी को अपने शास्त्रार्थ से निरुत्तर कर यहां से भगा देता था। एक बार एक महापुरुष से काफी देर तक वाद-विवाद करता रहा। उन्होंने मेरे हठधर्मिता पर मुझे शाप दे दिया। माफी मांगने पर उन्होंने कहा कि कलयुग में गुरु नानक जी का आगमन होगा, उनकी कृपा दृष्टि से ही तेरा उद्धार होगा।

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गुरु नानक देव ने उपदेश देते हुए कहा कि कर्म कांड और वाह्य आडंबर में लोग लिप्त हैं, लेकिन इनसे मोक्ष की प्राप्ति तब तक नहीं हो सकती जब तक कि निश्चय के साथ परम पिता का स्मरण न किया जाए। गुरुजी के अलौकिक वचनों को सुन सभी के शीश श्रद्धापूर्वक गुरु चरणों में झुक गए, वहीं पंडित चतुरदास का मन भी निर्मल हो गया। इस पर पंडित गोपाल शास्त्री ने कहा कि गुरु महाराज आपके चरण पड़ने से मेरा ये बाग पवित्र हो गया है। इसलिए अब ये बाग आपके चरणों में समर्पित है। उसी दिन से यह बाग गुरुबाग के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

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गुरु के प्राकट्य उत्सव को सिख समाज श्रद्धा के साथ मनाता है। कबीर साहब की गुरुवाणी को गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान दिया गया है। संत रविदास के पदों को भी गुरु ग्रंथ साहिब में अंकित किया गया है। गुरुनानक देव की वाणी से समाज में फैला अंधियारा दूर हुआ था। - भाई बलजीत सिंह, मुख्यग्रंथी, गुरुबाग

प्रकाशपर्व पर गुरुद्वारों में तैयारियां कई दिनाें से चल रही थीं। अखंड कीर्तन पाठ के साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गुरुग्रंथ साहिब का शहाना स्वागत किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए अटूट लंगर का भी इंतजाम किया गया है। - भाई धरमवीर सिंह, ग्रंथी 

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