129 साल के योग गुरु बाबा शिवानंद संयम, योग और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। उनकी सादगी ने अविभाजित बंगाल के शिवानंद को काशी में बाबा शिवानंद बनाया। दुनिया के सबसे बुजुर्ग इंसान होने के बाद भी उनकी फुर्ती हर किसी को हैरान कर देती थी।
पूरी दुनिया ने किया था बाबा शिवानंद की योग कला का दर्शन
2022 में 126 साल की उम्र में जब वह पद्मश्री लेने राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो सम्मान लेने के पहले नंदी मुद्रा में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को प्रणाम कर उन्होंने अपनी योग कला का प्रदर्शन भी किया था। इतनी अवस्था में उनकी योग कला का दर्शन पूरी दुनिया ने किया था। महाकुंभ में भी उनका शिविर लगा था और उन्होंने संगम स्नान भी किया था।
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योग गुरु स्वामी शिवानंद बाबा का निधन
- फोटो : अमर उजाला
छह साल से ही अपनाया योग
चार वर्ष की उम्र में अपने परिवार से अलग हो गए बाबा शिवानंद ने छह वर्ष की उम्र से ही योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया था। बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को अविभाजित बंगाल के श्रीहट्ट जिले के ग्राम हरिपुर (थाना क्षेत्र बाहुबल) में एक गोस्वामी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता भीख मांगकर अपनी आजीविका चलाते थे।
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बाबा शिवानंद को सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : अमर उजाला
चार साल की उम्र में माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया। शिवानंद छह साल के थे, तभी उनके माता-पिता और बहन की भूख के चलते निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने गुरु के सानिध्य में आध्यात्म की दीक्षा लेनी शुरू की थी।
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आश्रम पर बाबा शिवानंद का आशीर्वाद लेने पहुंचे भक्त।
- फोटो : अमर उजाला
सादा भोजन और योग में बिताए 123 वर्ष
अंतिम समय तक योग उनके जीवन में रहा। छह वर्ष की आयु से ही संयमित दिनचर्या का पालन करते थे। ब्रह्म मुहूर्त में तीन बजे ही चारपाई छोड़ देते और स्नान-ध्यान के बाद नियमित एक घंटे योग करते थे। दुर्गाकुंड इलाके में स्थित आश्रम में शिवानंद बाबा का कमरा तीसरी मंजिल पर है। शिष्यों के मुताबिक वे दिन भर में तीन से चार बार सीढ़ियों से चढ़ते और उतरते थे।
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पद्मश्री शिवानंद बाबा
- फोटो : ANI
कभी स्कूल नहीं गए
बाबा के शिष्यों ने बताया कि वे फल और दूध का भी सेवन नहीं करते थे। उन्होंने विवाह नहीं किया था। वे कभी स्कूल नहीं गए, जो कुछ सीखा वह अपने गुरु से ही। उन्हें अंग्रेजी का भी अच्छा ज्ञान था।