देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में नव संवत्सर और नवरात्र का जोरदार स्वागत हुआ। घाट और देवी मंदिरों में सुबह से ही भारी भीड़ देखी गई। अस्सी घाट पर विशेष गंगा आरती और उगते सूरज को अर्घ्य दिया।
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Nav Samvatsar in Varanasi
- फोटो : अमर उजाला
वहीं शंकराचार्य घाट पर बटुकों ने अर्ध्य दिया । इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कैलेंडर का विमोचन किया। वहीं नव शक्तियों से युक्त नवरात्र में देवी के दर्शन, वंदन के लिए मंगलवार की आधी रात के बाद से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा।
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प्रथम दिन की देवी मां शैलपुत्री के दर्शन के लिए आस्थावानों की लंबी कतार लग गई। कामनाओं की पूर्ति के संकल्प के साथ बुधवार की सुबह कलश स्थापना हुई। आंतरिक शक्तियों के विस्तार और मन की शुद्धता के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ हुए ।
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Nav Samvatsar in Varanasi
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वहीं अखंड दीप जलाकर होगा आठ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हुआ। द्वितीया तिथि के क्षय की वजह से इस बार आठ दिवसीय नवरात्र की आराधना होगी।
देवी पुराण के अनुसार दुर्गा की आराधना से नवरात्र में आसुरी शक्तियों के अलावा विघ्न, रोग, पाप, भय का नाश होता है।
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- फोटो : अमर उजाला
नवरात्र में भगवती की आराधना दुर्गतियों का नाश करने वाली होती है। ऐसी आस्था और कामना से भरे श्रद्धालु एक तरफ जहां देवी मंदिरों के दरबारों में हाजिरी लगाने के लिए रात 12 बजे के बाद कतारबद्ध हो गए।