वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से अभी भी पूरी दुनिया जूझ रही है। इसको रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सबसे महत्वपूर्ण सुझाव सोशल डिस्टेंसिंग का दिया था। जिससे कि लोगों में कोरोना का संक्रमण रोका जा सके। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को देश के नाम संबोधन में 25 मार्च की रात से संपूर्ण देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। 24 अगस्त को देश में लॉकडाउन के पांच महीने हो गए। वाराणसी में भी इसका असर पड़ा था। देखें अगली स्लाइड्स में...
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अस्सी घाट पहले और अब।
- फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी में भी लॉकडाउन लगाया गया था। इससे पहले पीएम मोदी ने 22 मार्च को एक दिन के लिए जनता कर्फ्यू लगाया था। इसकी सफलता के बाद पीएम मोदी ने संपूर्ण देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। इसके बाद सभी सामाजिक स्थल, टूरिस्ट स्पॉट, यातायात, सब कुछ बंद कर दिया था। हालांकि जरूरी सामान जैसे, राशन, दवा की दुकान, अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया गया था।
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हरिश्चंद्र घाट पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी में गंगा घाट, मंदिर, सड़कों पर जहां भीड़ रहती थी, वहां पर एक दम सन्नाटा पसर गया था। अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट पर सन्नाटा छा गया था। गंगा में चलने वाली नावें बंद हो गई थीं। यहां पर हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते थे, अब वहां सिर्फ सन्नाटा दिखता था।
दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर रौनक हमेशा लगी रहती थी। गंगा आरती देखने के लिए करीब एक लाख लोग आते थे। लॉकडाउन में गंगा आरती भी सूक्ष्म रूप में होने लगी थी। फिलहाल घाटों पर फिर से वही रौनक लौटने लगी है। लोग मास्क लगाकर घूमते नजर आते हैं। लेकिन पहले जैसा माहौल होने में अभी समय लग सकता है।
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दशाश्वमेध घाट पर अब दिखने लगी रौनक।
- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी ने 24 मार्च को देश के नाम संबोधन में की थी। जो 25 मार्च से 14 अप्रैल तक था। इसके बाद लॉकडाउन को आगे बढ़ाकर 15 अप्रैल से 3 मई तक कर दिया। फिर इसे बढ़ाकर 17 मई तक किया गया। 18 मई से लॉकडाउन 4.0 शुरू हो गया था।