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बारिश पर भारी आस्था: श्रद्धालुओं ने पन्नी ओढ़कर देखी रामलीला, भावुक हुए दशरथ; गूंजा राम का नारा

Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
सार

बारिश के बीच रामनगर की रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मंचन हुआ। छतरी और बरसाती की ओट में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचे। पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद राजा दशरथ के घर श्रीराम के जन्म की किलकारी गूंजी तो अयोध्या नगरी बधाई गीतों से गूंज उठी। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

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Faith Prevails Over Rain Devotees Watched Ramlila Covered Plastic Sheets Dasharath Moved to Emotion
पन्नी ओढ़कर मंचन करने जाते रामलीला के पात्र। - फोटो : संवाद

दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना, मानहु ब्रह्मानंद समाना यानी राजा दशरथ पुत्र का जन्म कानों से सुनकर मानो ब्रह्मानंद में समा गए। जब माता कौशल्या ने बाल रूप धारण करने का आग्रह किया, तब प्रभु बालक के रूप में रोने लगे। चारों भाइयों के जन्म से पूरी अयोध्या नगरी आनंदोत्सव में डूब गई। बधाई गीतों और वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच राजा दशरथ ने ब्राह्मणों को दान दिया। विश्व प्रसिद्ध रामलीला के दूसरे दिन लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं भी लीला प्रेमियों की अटूट आस्था को डिगा नहीं सकीं।



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श्रद्धालुओं ने ऐसे देखा राम जन्मोत्सव। - फोटो : संवाद

शनिवार को अयोध्या मैदान में भारी जलभराव के कारण लीला थोड़ी देर से शुरू हुई। नगर निगम के कर्मचारी मैदान से पानी निकालने में जुटे रहे, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु छतरी, बरसाती और पॉलिथीन शीट की ओट लिए मैदान में डटे रहे। शाम साढ़े छह बजे कुंवर अनंत नारायण सिंह की सवारी पहुंचते ही रामलीला का विधिवत शुभारंभ हुआ। रामलीला के दूसरे दिन का मंचन अयोध्या नगरी पर केंद्रित रहा। 

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रामलीला में मंचन करते हुए। - फोटो : संवाद

कथा के अनुसार, अपार धन-धान्य, ऐश्वर्य और चक्रवर्ती सम्राट की पदवी होने के बावजूद राजा दशरथ संतानहीनता के कारण गहरे अवसाद में थे। अवध के महल का आंगन बच्चों की किलकारी के बिना सूना था। व्यथित होकर राजा दशरथ कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे और अपना दुख व्यक्त करते हुए भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि आयु का चौथा पड़ाव आ चुका है, किंतु संतान सुख से वंचित रहने के कारण मन अत्यंत खिन्न रहता है।

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रामलीला देख लगे दशरथ पुत्रों के जयकारे। - फोटो : अमर उजाला

महर्षि वशिष्ठ ने ढांढस बंधाते हुए उन्हें पूर्वजन्म का स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि पूर्व जन्म में वे राजा मनु और महारानी शतरूपा थे। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं उनके पुत्र के रूप में अवतरित होने का वरदान दिया था। गुरुदेव के निर्देश पर राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ की पूर्णाहुति पर साक्षात अग्निदेव प्रकट हुए और खीर देकर तीनों रानियों में बांटने का आदेश दिया। इसके बाद प्रभु श्रीराम के अलौकिक अवतार की विराट झांकी प्रस्तुत की गई। देवताओं और माता कौशल्या ने प्रभु की स्तुति की।

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पेट्रोमैक्स की रोशनी में होती है पूरी लीला। - फोटो : अमर उजाला

लीला के अंतिम चरण में महर्षि वशिष्ठ द्वारा चारों बालकों का नामकरण श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूप में किया गया। इसके बाद उनका यज्ञोपवीत संस्कार, गुरुकुल में शिक्षा-दीक्षा और श्रीराम द्वारा मृग का शिकार कर राजा दशरथ को दिखाने का प्रसंग मंचित हुआ। माता कौशल्या द्वारा चारों भाइयों की मंगल आरती के साथ दूसरे दिन की लीला को विश्राम दिया गया।

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