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बनारस में इस बात पर भिड़ गए सपा के कद्दावर नेता और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य

Thu, 19 Apr 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 19 Apr 2018 02:19 PM IST
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Dispute between SP leader and pupil of swami swaroopanand saraswati in varanasi
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
बनारस में एक बैठक के दौरान सपा के कद्दावर नेता और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप इस कदर बढ़ गए कि दस मिनट तक हंगामे की स्थिति रही। आगे की स्लाइड्स में जाने पूरा मामला...


 
Dispute between SP leader and pupil of swami swaroopanand saraswati in varanasi
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
विश्व धरोहर दिवस पर काशी की धरोहर बचाने के लिए बुधवार को पराड़कर स्मृति भवन में धरोहर बचाओ समिति की ओर से विद्वत बैठक आयोजित की गई थी। इसमें पहुंचे सपा एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने काशी विश्वनाथ मंदिर को धरोहर घोषित करने की बात कही। 

 
Dispute between SP leader and pupil of swami swaroopanand saraswati in varanasi
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि जगन्नाथ पुरी, कोणार्क मंदिर और कामाख्या देवी के मंदिर पहले से इस श्रेणी में शामिल किए जा चुके हैं। इसके लिए वह 10 साल से विधान परिषद में लड़ाई लड़ रहे हैं। बाबा दरबार के प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखने के लिए सबको एकजुट होना होगा। इसके बगैर इसमें सफलता नहीं मिलेगी। 

 
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Dispute between SP leader and pupil of swami swaroopanand saraswati in varanasi
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
बैठक में मौजूद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद यह सुनकर उखड़ गए। उन्होंने तेज आवाज में शतरूद्र प्रकाश के विश्वनाथ मंदिर को धरोहर कहे जाने का प्रतिकार किया। उन्होंने कहा कि मंदिर को धरोहर कहना गलत है। धरोहर वो है जिसमें जीवन नहीं है जबकि विश्वनाथ मंदिर पूरी तरह से जीवंत है। 

 
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Dispute between SP leader and pupil of swami swaroopanand saraswati in varanasi
शतरूद्र प्रकाश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में हो रही तोड़फोड़ पर नाराजगी जताई। जिस तरह से हजारों साल से पूजित प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है, वह उनकी रक्षा के संकल्प से कार्यक्रम में आए थे, धरोहर दिवस के कार्यक्रम में नहीं। इसके बाद इस मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शतरूद्र प्रकाश के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस हुई। 

 
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