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नइहरे में मांगीला भाई रे भतीजवा ससुरे भरल परिवार... छठ पर्व पर घर, परिवार व समाज के मंगल की कामना
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 27 Oct 2017 04:10 PM IST
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छठ पर्व
- फोटो : अमर उजाला
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बनारस में छठ पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। अस्सी से राज घाट के अलावा संत रविदास घाट से विश्व सुंदरी पुल तक व्रतियों और उनके परिवारीजनों, रिश्तेदारों की भीड़ के चलते कहीं खड़े होने तक की जगह नहीं बची। इसके अलावा राणा महल घाट, अहिल्याबाई घाट, पांडेय घाट, केदार घाट सहित अन्य घाटों पर ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
छठ पर्व
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‘बाजे तोहें झंझकार ए छठ मइया बाजे तोहें झंझकार/नइहरे में मांगीला पांच रे बिरनवा बहिनी जे मांगिली अकेल/नइहरे में मांगिला भाई रे भतिजवा ससुरे भरल परिवार ये छठ मइया.... अपने के मांगीला अवध सिंधोरवा जुग जुग बाढ़े अहिवात/घोड़ा चढ़ल पुत्र एक मांगीला सुंदर सांवर पतोह ये छठ मइया...।’
छठ पर्व
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सूर्योपासना के डाला षष्ठी व्रत पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने गंगा तटों, सरोवरों, कुंडों पर महिलाओं की भीड़ नैहर से ससुराल तक की समृद्धि और मंगलकामना के ऐसे ही गीत गाते हुए पहुंची। शहनाई की मंगलध्वनि, बैंड-बाजा और आतिशबाजी के बीच लोकोत्सव की छटा निहारते बनी।
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सांझ ढलने के साथ ही अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने घर, परिवार से लेकर सकल समाज के मंगल के लिए कामना की। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही आज व्रत का पारण हुआ। इससे पहले गुरुवार को गंगा तट पर बनी वेदियों पर डाला सजाने के लिए व्रतियों के समूह बाजे-गाजे के साथ घरों से निकले थे।
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अस्सी से राज घाट के अलावा संत रविदास घाट से विश्व सुंदरी पुल तक व्रतियों और उनके परिवारीजनों, रिश्तेदारों की भीड़ के चलते कहीं खड़े होने तक की जगह नहीं बची। मनौती मानने वाली तमाम व्रती महिलाएं सड़कों पर लेटते हुए वेदियों तक पहुंचीं। दशाश्वमेध घाट पर भी भीड़ उमड़ पड़ी। वेदियों पर हल्दी-चंदन की अल्पनाएं उकेरी गईं।