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चीफ प्रॉक्टर ने धरना दे रहे नर्सिंग स्टूडेंट्स को मारा थप्पड़, फिर गरमाया बीएचयू
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:56 AM IST
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varanasi
- फोटो : self
बीएचयू नर्सिंग कॉलेज की मान्यता न होने के विरोध में छात्र-छात्राएं गुरुवार को कॉलेज के सामने रास्ता जाम कर धरना दे रहे थे। धरने की जानकारी होने पर बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह वहां पहुंची। इसी दौरान बातचीत करते हुए उन्होंने पहले एक छात्रा को फिर एक छात्र को थप्पड़ मार दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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नर्सिंग छात्राएं
- फोटो : amar ujala
इसके बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कर्मचारियों के साथ ही सुरक्षा गार्डों ने एक छात्र को बीच सड़क जमकर पीटा। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने अपना प्रदर्शन और तेज कर दिया। बीएचयू बीएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनका कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसलिंग से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसकी जानकारी के बाद समस्या के समाधान के लिए हम लोग दो दिन लगातार सेंट्रल ऑफिस गए थे। वहां हमारी कहीं सुनवाई नही हुई।
धरना देती छात्राएं
- फोटो : amar ujala
इस पर आज सुबह हम लोग शांतिपूर्वक अपने कॉलेज के सामने धरने पर बैठ गये। छात्रा ने आरोप लगाया कि धरने की खबर पर चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह धरनास्थल पर पहुंचीं और हमे जबरदस्ती वहां से उठाना शुरू कर दिया। जब हमने इस बात का विरोध किया तो हमारी एक साथी पर उन्होंने थप्पड़ जड़ दिया। उन्होंने साथ ही कहा कि 29 नवंबर के धरने की जानकारी 28 नवंबर को चीफ प्रॉक्टर और डॉयरेक्टर ऑफिस सहित अन्य जगहों पर दी जा चुकी थी।
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पिछले तीन बैच के छात्रों ने केंद्रीय कार्यालय पर दिया ज्ञापन
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धरना दे रही छात्रा ने बताया कि दो साल पहले डीन और डायरेक्टर को पत्र लिखा। उन्होंने मौखिक आश्वासन दिया कि आपकी समस्या का हल निकाल लिया जाएगा। महीने भर पहले वो कुलपति से भी मिले। उन्होंने भी आश्वासन दिया लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।
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छात्रों का कहना है कि 2015, 2016 और 2017 बैच के छात्र-छात्राओं के सामने उनके करियर का संकट खड़ा हो गया है। 2015 बैच के छात्रों का पाठ्यक्रम छह महीने बाद खत्म हो रहा है। ऐसे में छह महीने के अंदर मान्यता के संबंध में कुछ नहीं हुआ तो उनकी डिग्री ही मान्य नहीं होगी। दरअसल, नर्सिंग कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्य नहीं है। ऐसे में उनकी डिग्री भी मान्य नहीं होगी। ऐसे 260 छात्र-छात्राओं को अपने करियर की चिंता है। उनकी कहना है कि जब 2015, 2016 और 2017 की मान्यता नहीं थी तो विश्वविद्यालय ने प्रवेश क्यों लिया।