फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   International Day Girl Child 45 children found abandoned in 34 months 27 of them girls in varanasi

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: 34 महीनों में 45 बच्चे मिले लावारिस, इनमें 27 बेटियां; मां की ममता पर गंभीर सवाल

Sun, 11 Oct 2026 12:22 PM IST
Aman Vishwakarma अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 11 Oct 2026 12:22 PM IST
सार

वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। पिछले 34 महीनों में जिले में 45 बच्चे लावारिस हालत में मिले, इनमें 27 बेटियां हैं। आंकड़े बालिकाओं की सुरक्षा और संरक्षण की जरूरत को रेखांकित करते हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

विज्ञापन
International Day Girl Child 45 children found abandoned in 34 months 27 of them girls in varanasi
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

वाराणसी जिले में जनवरी 2024 से सितंबर 2026 के बीच 34 महीनों में 45 बच्चे लावारिस मिले हैं, इनमें 27 बेटियां हैं। इन बेटियों को किसी ने अस्पताल में तो किसी ने बीच रास्ते में हाईवे किनारे छोड़ दिया था। 

विज्ञापन


हर साल 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। नवरात्र में बेटियों के पांव पखारकर उनकी पूजा भी होगी। बावजूद इसके बालिकाओं के प्रति लोगों का नजरिया नहीं बदल रहा है। स्थिति यह है कि जन्म के कुछ घंटों के भीतर ही बेटियों को मरने के लिए कंटीले झाड़ियों के बीच छोड़ जा रहे हैं। उन्हें चंद घंटों पहले जन्म दिए बच्चे के प्रति जरा भी ममता नहीं है। 

विज्ञापन
Trending Videos

बेटियों को गोद लेने वालों की संख्या भी बढ़ी : जिला प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 27 बेटियों में 14 को देश के विभिन्न राज्यों के दंपतियों ने गोद लिया है। इनमें एक बच्ची को सिंगापुर के एनआरआई दंपती ने गोद लिया है। वहीं, शून्य से 10 वर्ष की उम्र की 13 बच्चियों को अब भी मां-बाप के प्यार और दुलार के साये का इंतजार है।

60 दिनों के बाद अनाथ घोषित की जाती हैं बेटियां : लहुराबीर स्थित राम कुमारी आश्रम के प्रभारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि लावारिस हाल में बेटियां ही ज्यादा मिलती हैं। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर बच्चे यहां लाए जाते हैं। इन बच्चों का पूरा मेडिकल टेस्ट कराने के बाद ही उन्हें भर्ती किया जाता है। मेडिकल के आधार पर उनकी पहचान के लिए विज्ञापन भी जारी किए जाते हैं। परिजनों को बच्चों को अपनाने के लिए 60 दिन का समय मिलता है। 

विज्ञापन

पढ़ें ये मामले

शिवपुर थाना क्षेत्र के शुद्धिपुर में बीते 19 सितंबर को झाड़ियों में एक बच्ची रोती हुई मिली थी। पास से गुजर रही महिला ने उसे रोते हुए सुना तो पुलिस को सूचना दी। बच्ची को मिठाई के एक झोले में भरकर कोई छोड़ गया था। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। उसे सीडब्ल्यूसी की मदद से लहुराबीर स्थित अनाथ आश्रम में भर्ती कराया। अब वह स्वस्थ है।

बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरहुआ में 31 अगस्त को एक नवजात बच्ची रिंग रोड फेज-2 पर मां दुर्गा मंदिर के समीप झाड़ियों में मिली थी। बच्ची को रोते देख ग्रामीणों ने पुलिस को बुलाया। मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म करीब चार घंटे पहले ही हुआ था। बच्ची को बाद में काशी अनाथालय भेजा गया।

मिर्जामुराद के अमिनी गांव में नौ नवंबर 2025 को पोखरे किनारे एक नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस और चिकित्सकों की जांच में सामने आया कि बच्ची को दो-तीन दिनों के भीतर बेरहमी से फेंका गया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या में प्राथमिकी दर्ज की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed