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बिस्मिल्लाह खां जयंतीः उस्ताद की शहनाई की धुन से हुई थी आजादी की भोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:20 PM IST
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bismillah
- फोटो : youtube
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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की आज जयंती है। बिस्मिल्लाह खान का जन्म बिहार प्रदेश के डुमरांव के ठठेरी बाजार में हुआ था। आठ वर्ष की उम्र में वो वाराणसी आ गए और यहां के हो गए। शहनाई के जादूगर बिस्मिल्लाह खां के शहनाई की धुन ही थी, जिससे आजादी की पहली भोर हुई थी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी थे उस्ताद के मुरीद।
बनारस के हड़हा सराय निवासी भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई में मर्म समझने की कुछ खास बात जरूर थी। इसीलिए सात समंदर पार तक इस अमर फनकार की बुलंदियां आज भी कायम हैं। शहनाई ने उन्हें नहीं बल्कि उन्होंने शहनाई को नई पहचान दी।
बिस्मिल्लाह खां
21 मार्च, 1916 को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जन्म हुआ था। संगीत की बात चले तो इस शहनाई के बिना वह पूरी नहीं होती।
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BISMILLAH KHAN
- फोटो : SELF
यह अलग बात है कि आज वह अद्भुत फनकार हमारे बीच नहीं है पर शहनाई पर उनके साज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
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उस्ताद बिस्मिल्ला खां
- फोटो : ANI
गंगा जमुनी तहजीब के अमल बरदार, काशी की अनमोल धरोहर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां शहनाई के शहंशाह ऐसे ही नहीं थे। संकट मोचन मंदिर से लेकर मोहर्रम के जुलूस में शहनाई के जरिये उन्होंने ताउम्र कौमी एकता की मिसाल पेश की।