उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुए हत्याकांड में एक बार फिर से कानून व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह के भाई देवेंद्र प्रताप सिंह और नरेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों आरोपी नामजद थे। अज्ञात के रूप में दर्ज आपंच आरोपी हिरासत में हैं। इनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है। धीरेंद्र समेत छह अन्य नामजद और अज्ञात 20 आरोपी फरार हैं। देवेंद्र को रेवती रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया है। देखें अगली स्लाइड्स...।
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आरोपी को पकड़ती पुलिस
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जिले के रेवती थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव के पंचायत भवन में गुरुवार को टेंट लगाकर हनुमानगंज और दुर्जनपुर की कोटे की दुकानों के चयन के लिए दोपहर बाद लगभग साढ़े तीन बजे खुली बैठक की जा रही थी। इसमें चार महिला समूहों ने आवेदन किया था। दुर्जनपुर की दुकान के लिए मां शायर जगदंबा और शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह के बीच मतदान की नौबत आ गई।
इस पर एसडीएम सुरेश कुमार पाल, सीओ चंद्रकेश सिंह और एसओ प्रवीण कुमार सिंह ने व्यवस्था बनाई कि जिसके पास आधार कार्ड अथवा अन्य कोई पहचान पत्र होगा, वही वोट कर पाएगा। एक पक्ष के लोग आधार कार्ड लेकर आए थे। दूसरे पक्ष के लोगों के पास पहचान पत्र नहीं था।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
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इसी बात पर हंगामा हो गया। स्थिति बिगड़ते देख बीडीओ बैरिया गजेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक की कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों में तनातनी शुरू हो गई। प्रशासन के विरोध में नारेबाजी हुई। देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान धीरेंद्र ने फायरिंग कर दी। इसमें दुर्जनपुर निवासी जयप्रकाश पाल(45) को चार गोलियां लगीं। लोगों ने जयप्रकाश को सीएचसी सोनबरसा पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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Ballia murder case
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इसके अलावा ईंट पत्थर और लाठी-डंडों से नरेंद्र सिंह(45), आराधना सिंह(45), आशा सिंह(40), राजेंद्र सिंह(45), अजय सिंह(50) और धर्मेंद्र सिंह(40) गंभीर रूप से घायल हो गए। एसडीएम, सीओ के अलावा मौके पर मौजूद 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में धीरेंद्र समेत आठ नामजद और 25 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।