घटना के बाद एसपी डॉ. अनिल कुमार बृहस्पतिवार की देर शाम मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि मृतक अरविंद की अनाथ हो चुकी दोनों बच्चियों को गोद ले रहे हैं। अपनी एक महीने की सैलरी और अन्य कर्मियों की, जो सहमत होंगे, उनकी एक दिन की सैलरी बच्चियों के नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट कराएंगे। जो उनके 18 वर्ष पूरे होने पर मिलेगी।
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर में जो घटना हुई है, उससे हम काफी दुखी हैं। एसपी ने बताया कि हमने इस संबंध में डीएम साहब से भी वार्ता की है। सरकार की ओर से बच्चियों को जो भी सहायता मिलती है, वह उपलब्ध कराई जाएगी।
बाल सेवा योजना की तरफ से उन्हें हर महीने 2500-2500 रुपये दिया जाएगा, जब तक कि वह बालिग नहीं हो जाती हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से भी इन्हें 30 हजार रुपये की सहायता दिलाई जाएगी।
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एक साथ जलीं चिताएं।
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मृतक की जेब में मिलीं 18 गोलियां
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि कोई भी पुलिस कर्मी बच्चों को नहीं मार सकता। हमने पहले ही तय किया था कि उस 10 बाई 15 के कमरे में सिर्फ हम तीन लोग घुसेंगे। हमारी तरफ से निर्देश था कि कोई भी चौथा पुलिसकर्मी कमरे में नहीं घुसेगा, भले ही हम मर जाएं। आरोपी के पास रिवाल्वर के साथ ही एक टॉर्च भी था। उसे अंदेशा था कि पुलिस कार्रवाई करने के लिए घर की बिजली काट सकती है। जब हम कमरे में घुसे तो उसने हमारे ऊपर फायर झोंक दिया। हमारी पीठ के पीछे जो अलमारी रखी थी, उसमें कई गोलियां लगी हैं। मृतक की जेब में 18 गोलियां मिलीं हैं।
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घर के बाहर पुलिस।
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जब सात घंटे इंतजार कर सकते थे तो 70 घंटे भी करते
एसपी ने कहा कि हमारी ओर से प्रयास था कि हम तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालें। बच्चों को उसने बंधक बना रखा था, इसलिए अयोध्या से एटीएस को भी बुलाया गया था। क्योंकि इन लोगों को ऐसे समय के लिए ही प्रशिक्षित किया जाता है। बच्ची काफी रो रही थी, लेकिन कुछ देर बाद ही बच्ची का रोना भी बंद हो गया। हमें डर था कि कहीं उसने बच्ची को मार न दिया हो। हम मौका मिलने का इंतजार कर रहे थे। हमारी ओर से तैयारी थी कि मौका मिलने पर एक-दो सेकेंड में दरवाजा तोड़कर बच्चों को बचाया जाए। लेकिन, जब फायर की आवाज आई तो हमें दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा। क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि वह दूसरी गोली चलाए।
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अरविंद के घर के बाहर गमगीन माहाैल।
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2019 में बना था अरविंद का लाइसेंस
एसपी ने बताया कि अरविंद के भाई सुनील के नाम पर 2025 में राइफल का लाइसेंस बना था। इसके बाद सुनील ने 2007 में रिवाल्वर का लाइसेंस बनवाया। सुनील की हत्या के बाद अरविंद ने 2019 में रिवाल्वर का लाइसेंस बनवाकर रिवाल्वर को वरासत में अपने नाम चढ़वा लिया। लेकिन, सुनील की राइफल जमा हो गई। उसी रिवाल्वर से उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया।
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मृतकों की फाइल फोटो।
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पुलिस की गोली से होती शौर्य की मौत, एंगल होता दूसरा
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि शौर्य के मौत की बात पुलिस की गोली से होने की बताई जा रही है, जो पूरी तरह से निराधार है। क्योंकि अगर पुलिस की गोली से शौर्य की मौत होती तो गोली ऊपर से नीचे की ओर से जाती लेकिन उसे जो गोली लगी है, वह नीचे से ऊपर की ओर से गई है। इससे यह स्पष्ट है कि गोली अरविंद ने ही मारी है। दूसरी बात, गोली अगर दूर से लगती है तो सिर्फ घाव होता है। लेकिन, अगर गोली सटाकर मारी जाती है तो घाव के पास काले घेरे का निशान बनता है, जिसे बच्चे की चोट के पास आसानी से देखा जा सकता है।